जज़्बात-ए-ग़ज़ल: अगर है दोस्ती कीचड़ उछाल सकता है- ग़ज़लकार(मुकेश कुमार सिंह ‘मुसाफ़िर’)
अगर है दोस्ती कीचड़ उछाल सकता है है जिसके हाथ में सिक्का उछाल सकता है, मगर नतीजा वो कैसे निकाल सकता है, है आफ़ताब के बस में अगर वो चाहे तो, बना के बर्फ़ को पानी उबाल सकता है, अगर है दुश्मनी पत्थर उछालेगा मुझ पर, अगर है दोस्ती कीचड़ उछाल सकता है, ख़ुशी किसी … Continue reading जज़्बात-ए-ग़ज़ल: अगर है दोस्ती कीचड़ उछाल सकता है- ग़ज़लकार(मुकेश कुमार सिंह ‘मुसाफ़िर’)
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