जज़्बात-ए-ग़ज़ल: वो दिल दुखा के मेरा ये उमीद रखता है- ग़ज़लकार(मुकेश कुमार सिंह ‘मुसाफ़िर’)
वो दिल दुखा के मेरा ये उमीद रखता है ज़रूरतों के मुताबिक मैं कुछ तो चाहूँगा वगरना कैसे कोई राब्ता निभाऊँगा वो दिल दुखा के मेरा ये उमीद रखता है लिहाज़ करते हुए उसका मुस्कुराऊँगा जो मसअला है कहो मत यूँ जल्दबाज़ी में मैं वक़्त आने पे ही फ़ैसला सुनाऊँगा अभी ग़ुरूर है दिल में … Continue reading जज़्बात-ए-ग़ज़ल: वो दिल दुखा के मेरा ये उमीद रखता है- ग़ज़लकार(मुकेश कुमार सिंह ‘मुसाफ़िर’)
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