आरबीआई(RBI) का बड़ा फैसला: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, आर्थिक स्थिरता पर जोर

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RBI NEWS- Yuva Choupal News
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आरबीआई का बड़ा फैसला: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, आर्थिक स्थिरता पर जोर

नई दिल्ली 8 अप्रैल 2026भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 की अपनी पहली मौद्रिक नीति समीक्षा में बाजार की उम्मीदों के अनुरूप बड़ा फैसला लिया है। आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने दो दिनों की विस्तृत चर्चा के बाद सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है।

आरबीआई के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और चुनौतीपूर्ण आर्थिक हालातों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना है।

नीतिगत दरें यथावत, तटस्थ रुख बरकरार

नीतिगत निर्णय की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक ने अपना तटस्थ रुख बरकरार रखा है। रेपो रेट के साथ-साथ अन्य प्रमुख दरें भी जस की तस बनी हुई हैं:

  • बैंक दर और एमएसएफ (MSF): 5.50 प्रतिशत पर स्थिर।

  • एसडीएफ (SDF): 5.00 प्रतिशत पर बरकरार।

गवर्नर मल्होत्रा ने स्वीकार किया कि पिछला वर्ष (2025) काफी चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन अक्टूबर की नीति के बाद से मुद्रास्फीति (महंगाई) में कमी आना एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने बैंकिंग प्रणाली की बेहतर कार्यकुशलता को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख सहारा बताया।

वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय इकोनॉमी

आरबीआई की यह घोषणा वैश्विक स्तर पर बड़े घटनाक्रमों के बीच हुई है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार में तेजी के रूप में भी देखा गया।

हालांकि, गवर्नर मल्होत्रा ने चेतावनी दी कि वैश्विक चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। विशेषकर पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की ऊँची कीमतें भारत की विकास दर पर दबाव डाल सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहरी कारक भारत की आर्थिक गति के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं।

विकास दर का अनुमान और भविष्य की राह

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।

गवर्नर ने भरोसा जताया कि अभूतपूर्व वैश्विक चुनौतियों, आपूर्ति-पक्ष की बाधाओं और ऊर्जा कीमतों में उछाल के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है। उन्होंने कहा कि देश की मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति पहले की तुलना में कहीं अधिक स्थिर और सक्षम है, जो किसी भी बाहरी झटके को सहने में समर्थ है।

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