मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक अहम कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देशभर की सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य कॉमर्शियल संस्थानों को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन देने में प्राथमिकता दें। इस फैसले का उद्देश्य इन संस्थानों को निर्बाध गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना है, ताकि बढ़ती मांग और संभावित आपूर्ति बाधाओं के बीच भी उनका काम प्रभावित न हो। सरकार का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में पारंपरिक एलपीजी (LPG) पर निर्भरता कम करना जरूरी हो गया है। एलपीजी की आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय बाजार और भू-राजनीतिक परिस्थितियों से ज्यादा प्रभावित होती है, जबकि PNG एक स्थिर और अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प है। यही कारण है कि सरकार अब बड़े पैमाने पर PNG के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।

मंत्रालय ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों को पत्र लिखकर गैस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी मंजूरियों को जल्द से जल्द मंजूरी देने के निर्देश दिए हैं। कई प्रोजेक्ट्स लंबे समय से पेंडिंग पड़े हैं, जिनके कारण गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार धीमा हो गया है। सरकार चाहती है कि इन बाधाओं को दूर कर तेजी से पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक उपभोक्ताओं तक PNG पहुंच सके। सरकारी दफ्तरों, कॉलोनियों और कैंटीनों को भी एलपीजी की बजाय PNG अपनाने की सलाह दी गई है। इससे न केवल गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि लॉजिस्टिक्स और स्टोरेज से जुड़ी समस्याएं भी कम होंगी। PNG के इस्तेमाल से सिलेंडर की आवश्यकता खत्म हो जाती है, जिससे सुरक्षा जोखिम भी कम हो जाता है।

PNG के कई फायदे हैं जो इसे एलपीजी के मुकाबले बेहतर विकल्प बनाते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पाइपलाइन के जरिए सीधे उपभोक्ता तक पहुंचती है, जिससे बार-बार सिलेंडर बदलने की जरूरत नहीं होती। इसके अलावा PNG पर्यावरण के लिए भी अधिक अनुकूल है, क्योंकि इसमें कार्बन उत्सर्जन अपेक्षाकृत कम होता है। लागत के मामले में भी यह कई मामलों में सस्ता पड़ सकता है, खासकर बड़े कमर्शियल उपयोगकर्ताओं के लिए।
दूसरी ओर, सरकार ने एलपीजी सप्लाई को भी बढ़ाने का फैसला किया है, ताकि मौजूदा संकट का तत्काल समाधान किया जा सके। 23 मार्च से राज्यों को मिलने वाली एलपीजी सप्लाई में 20% की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद कुल सप्लाई प्री-क्राइसिस स्तर के लगभग 50% तक पहुंचने की उम्मीद है। यह कदम उन क्षेत्रों के लिए राहत लेकर आएगा, जहां अभी PNG का नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बढ़ाई गई एलपीजी सप्लाई का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। सामुदायिक रसोई, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और औद्योगिक कैंटीनों को सबसे पहले गैस उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि उन्हें खाना बनाने में किसी तरह की परेशानी न हो।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल वर्तमान संकट से निपटने में मदद करेगा, बल्कि लंबे समय में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत बनाएगा। PNG नेटवर्क के विस्तार से देश में गैस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और आयातित ईंधनों पर निर्भरता कम होगी।
हालांकि, इस योजना को सफल बनाने के लिए राज्यों और गैस कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा। साथ ही, उपभोक्ताओं को भी PNG अपनाने के लिए जागरूक करना होगा। अगर यह रणनीति सही तरीके से लागू होती है, तो आने वाले समय में भारत में गैस आपूर्ति का ढांचा अधिक मजबूत और स्थिर हो सकता है। कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम एक दूरदर्शी नीति का हिस्सा है, जो न केवल मौजूदा संकट का समाधान देता है बल्कि भविष्य के लिए भी एक मजबूत ऊर्जा ढांचा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
और पढ़े – टीम इंडिया के घरेलू सीजन 2026-27 का ऐलान, 17 शहरों में 22 मैच खेलेगी भारत
























