विश्व भूख दिवस 2025: माताओं का पोषण, समाज की समृद्धि

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विश्व भूख दिवस 2025: माताओं का पोषण, समाज की समृद्धि


2025 में विश्व भूख दिवस “मातृ पोषण से समृद्धि की ओर” की थीम पर केंद्रित है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भूख और कुपोषण के खिलाफ लड़ाई सामूहिक प्रयासों से ही जीती जा सकती है। जानिए इसका इतिहास, वर्तमान स्थिति और हमारा योगदान।

भूमिका

हर साल 28 मई को विश्व भूख दिवस मनाया जाता है ताकि भूख और पोषण की समस्याओं पर लोगों का ध्यान केंद्रित किया जा सके। इस दिन को मनाने का उद्देश्य सिर्फ आंकड़ों को समझना नहीं, बल्कि उन लोगों की मदद करना है जो हर दिन पेट भरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।


विश्व भूख दिवस की शुरुआत

विश्व भूख दिवस की नींव “द हंगर प्रोजेक्ट” ने 2011 में रखी थी। इसका मुख्य मकसद था कि दुनिया भर के लोगों को एक साथ लाकर भूख की समस्या को समझाया जाए और उसके समाधान खोजे जाएं।


2025 की थीम का महत्व

इस साल की थीम है – “मातृ पोषण से समृद्धि की ओर”। यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक हकीकत है। जब महिलाएं स्वस्थ होती हैं, तब उनके बच्चे भी अच्छे से बढ़ते हैं। ये समाज के लिए दीर्घकालीन निवेश जैसा है।


दुनिया में भूख की मौजूदा तस्वीर

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, दुनियाभर में करोड़ों लोग अब भी पर्याप्त खाना नहीं खा पा रहे हैं। जलवायु संकट, युद्ध, और आर्थिक असमानता जैसी समस्याएं इस स्थिति को और बिगाड़ रही हैं।


माताओं और बच्चों पर कुपोषण का असर

कुपोषण का सबसे बड़ा असर महिलाओं और छोटे बच्चों पर होता है। पोषण की कमी से मांओं में खून की कमी, थकावट और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। इससे पैदा होने वाले बच्चों में भी वजन कम और शारीरिक विकास में बाधाएं देखी जाती हैं।


भारत की स्थिति और चुनौतियाँ

भारत की स्थिति कुछ ज्यादा ही गंभीर है। 2024 में ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत का स्थान 105वां था। देश में करोड़ों बच्चे और महिलाएं कुपोषण का शिकार हैं, खासकर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में।


सरकारी योजनाएँ जो भूख से लड़ रही हैं

भारत सरकार ने इस दिशा में कई कार्यक्रम शुरू किए हैं:

  • पोषण अभियान – मां और बच्चों के लिए पोषण में सुधार।

  • मिड-डे मील – स्कूलों में मुफ्त खाना।

  • आंगनवाड़ी सेवाएं – शुरुआती उम्र में पोषण और स्वास्थ्य सहायता।

ग्लोबल लक्ष्यों में भूख का समाधान

संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में “शून्य भूख” प्रमुख लक्ष्य है। साल 2030 तक दुनिया से भूख मिटाने का सपना रखा गया है। इसके लिए हर देश को अपने स्तर पर प्रयास करने होंगे।


एनजीओ और सामाजिक संगठनों की भूमिका

कई गैर-सरकारी संगठन भी भूख मिटाने में जुटे हुए हैं। ये ज़रूरतमंदों को खाना उपलब्ध कराने, पोषण जागरूकता फैलाने और समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने का काम करते हैं।


हम क्या कर सकते हैं?

आप और हम भी इसमें हिस्सा ले सकते हैं:

  • खाना बर्बाद न करें।

  • बचे हुए भोजन को ज़रूरतमंदों तक पहुंचाएं।

  • पोषण संबंधी जानकारी को लोगों तक फैलाएं।

  • स्थानीय NGO या फूड बैंक में दान करें।


शिक्षा और जानकारी से बदलाव

भूख के खिलाफ लड़ाई में शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है। जब लोग जानेंगे कि संतुलित आहार क्या होता है, या कौन-कौन से पौष्टिक विकल्प सस्ते में मिलते हैं, तब वे अपनी और अपने परिवार की सेहत को बेहतर बना सकेंगे।


आगे की राह

भविष्य में भूख और कुपोषण से निपटने के लिए कुछ जरूरी कदम हैं:

  • छोटे किसानों को समर्थन देना।

  • स्थानीय खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देना।

  • महिलाओं और किशोरियों की पोषण शिक्षा।

  • खाद्य आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना।


नतीजा

भूख सिर्फ एक सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि मानवाधिकार का मुद्दा है। 2025 की थीम यह बताती है कि यदि हम माताओं को स्वस्थ और सशक्त बनाएंगे, तो पूरा समाज अपने आप सशक्त बनेगा। इसलिए, इस विश्व भूख दिवस पर आइए हम सब मिलकर एक नई शुरुआत करें – एक ऐसी दुनिया के लिए जिसमें कोई भूखा न सोए।


 

FAQ

Q1. विश्व भूख दिवस कब मनाया जाता है?
A: हर साल 28 मई को।

Q2. 2025 की थीम क्या है?
A: “मातृ पोषण से समृद्धि की ओर”।

Q3. भारत में भूख की स्थिति कैसी है?
A: गंभीर है। भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2024 में 105वें स्थान पर है।

Q4. सरकार किन योजनाओं के जरिए भूख से लड़ रही है?
A: पोषण अभियान, मिड-डे मील, आंगनवाड़ी सेवाएं आदि।

Q5. आम नागरिक कैसे मदद कर सकते हैं?
A: खाना बर्बाद न करें, दान करें, और जागरूकता फैलाएं।

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