शासकीय नवीन महाविद्यालय गुढ़ियारी, संस्कृत महाविद्यालय रायपुर एवं एस के केयर हॉस्पिटल, पचपेड़ी नाका रायपुर तथा श्रेयांस एंड जी.एस. ओझा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आज गुढ़ियारी कॉलेज रायपुर में निःशुल्क मेगा स्वास्थ्य शिविर: 180 छात्रों का परीक्षण, विशेषज्ञों ने दिए अहम सुझाव

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शासकीय नवीन महाविद्यालय गुढ़ियारी, संस्कृत महाविद्यालय रायपुर एवं एस के केयर हॉस्पिटल, पचपेड़ी नाका रायपुर तथा श्रेयांस एंड जी.एस. ओझा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आज गुढ़ियारी कॉलेज रायपुर में निःशुल्क मेगा स्वास्थ्य शिविर: 180 छात्रों का परीक्षण, विशेषज्ञों ने दिए अहम सुझाव

 

शासकीय नवीन महाविद्यालय गुढ़ियारी, संस्कृत महाविद्यालय रायपुर एवं एस के केयर हॉस्पिटल, पचपेड़ी नाका रायपुर तथा श्रेयांस एंड जी.एस. ओझा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आज गुढ़ियारी कॉलेज रायपुर में मेगा निःशुल्क चिकित्सा एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में लगभग 180 छात्र-छात्राओं एवं प्राध्यापकों ने अपने स्वास्थ्य का परीक्षण करवाया। परीक्षणोपरांत रोगग्रस्त छात्र-छात्राओं को दवा का वितरण भी किया गया। शिविर में ब्लड प्रेशर, शुगर, हीमोग्लोबिन का निःशुल्क परीक्षण किया गया।

एस के केयर हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉ. जया बाजपेयी (डीएनबी मेडिसिन), डॉ. पीयूष शुक्ला, तथा उनकी पूरी टीम — ललित सेठी, सेवक साहू, तुमेंद्र साहू, शीतल साहू, सिस्टर नैना साहू, राज किरण साहू आदि — ने छात्रों का उत्साहपूर्वक स्वास्थ्य परीक्षण किया। ज्ञात हो कि एस के केयर हॉस्पिटल, रायपुर समाज सेवा के क्षेत्र में हमेशा अग्रसर रहा है। इसी क्रम में उन्होंने आज महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कर चिकित्सा परामर्श प्रदान किया तथा दवाएं भी वितरित कीं

शिविर को संबोधित करते हुए डॉ. जया बाजपेयी ने कहा कि छात्र अभी टीन एज से युवावस्था की ओर अग्रसर होते हैं। ऐसे में छात्र एवं छात्राओं में अलग-अलग तरह की समस्याओं के दर्शन होते हैं। इस समय हमारा आध्यात्मिक स्वास्थ्य, सामाजिक स्वास्थ्य — सभी प्रभावित होते हैं। 17 से 22 वर्ष की उम्र में इमोशनल स्ट्रेस इतना बढ़ जाता है कि कुछ गलत आदतें भी पड़ जाती हैं, जिससे हमें बचना चाहिए। इसके लिए हमें खानपान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। जंक फूड बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए, क्योंकि बाहर का खाना स्वास्थ्य के लिए बहुत घातक होता है।

इस उम्र में लड़कों एवं लड़कियों में हॉर्मोनल बदलाव होते हैं। लड़कियों को विशेष रूप से अपने स्वास्थ्य एवं हाइजीन का ध्यान रखना चाहिए। इसी उम्र में आरडीएच, हार्ट की बीमारियाँ तथा कई अनुवांशिक बीमारियाँ उभरने लगती हैं, जिनका समय रहते चेकअप करने से पता चल जाता है और हम गंभीर बीमारी से बच सकते हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. शुक्ला ने छात्र-छात्राओं को एकाग्रता बढ़ाने के लिए कुछ एक्सरसाइज बताई:

  1. गेंद को एक ही स्थान पर खड़े या बैठे होकर उछालें।

  2. उंगली को चारों ओर घुमाकर आंखों को उस पर केंद्रित करें।

  3. एक ही स्थान पर खड़े होकर जम्प करें — इससे एकाग्रता में वृद्धि होती है।

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मधुलिका अग्रवाल ने कहा कि स्वास्थ्य ही जीवन का सार है। यदि स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो आप कुछ भी अच्छे से नहीं कर सकते। आपकी आधी ऊर्जा बीमारी से लड़ने में खर्च हो जाती है। इसलिए स्वास्थ्य की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। गर्मी और परीक्षा के समय होने वाली बीमारियों से बचने के लिए हमने स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्रों में गजब का उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुसुम चंद्राकर ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजवंश कोहली ने किया।

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इस अवसर पर महाविद्यालय का समस्त स्टाफ —
डॉ. वंदना कुमार, श्री पद्मेश नाग, श्रीमती मधु उर्वषा, सुश्री नीतु सिंह, डॉ. स्मिता बर्गे, डॉ. शुभ्रा मिश्रा
एवं संस्कृत महाविद्यालय से डॉ. मनोज शुक्ला, योग शिक्षक श्री रविशंकर साहू विशेष रूप से उपस्थित थे।


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