सेना के आधुनिकीकरण को बड़ा बढ़ावा, डीएसी ने 23 लाख करोड़ के रक्षा प्रस्तावों को दी मंजूरी
नई दिल्ली, 26 मार्च — रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए करीब 23 लाख करोड़ रुपये के बड़े रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। यह फैसला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।
इस मंजूरी का उद्देश्य तीनों सेनाओं—थल सेना, वायु सेना और तटरक्षक बल—की क्षमताओं को आधुनिक तकनीक से मजबूत करना है। इसमें कई अहम रक्षा प्रणालियों और उपकरणों की खरीद शामिल है।
भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए एस-400 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली की खरीद को स्वीकृति दी गई है। यह सिस्टम दुश्मन के लंबी दूरी के हवाई हमलों को रोकने में सक्षम माना जाता है।
इसके अलावा, सुखोई सु-30 लड़ाकू विमानों के इंजन और संबंधित उपकरणों के नवीनीकरण को भी मंजूरी मिली है। इससे इन विमानों की सेवा अवधि बढ़ेगी और उनकी परिचालन क्षमता में सुधार होगा।
वायु सेना के परिवहन बेड़े को मजबूत करने के लिए एएन-32 और आईएल-76 विमानों के स्थान पर नए मध्यम परिवहन विमानों की खरीद का भी प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है। इसका उद्देश्य सामरिक और रणनीतिक एयरलिफ्ट क्षमता को बढ़ाना है।
सूत्रों के अनुसार, रिमोटली पायलेटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट (ड्रोन) को भी शामिल किया गया है, जो निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमलों में मदद करेंगे।
भारतीय सेना के लिए वायु रक्षा ट्रैक सिस्टम, बख्तरबंद भेदी टैंक गोला-बारूद, हाई-कैपेसिटी रेडियो रिले और धनुष गन सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी गई है। साथ ही, रनवे इंडिपेंडेंट एयर सर्विलांस सिस्टम को भी शामिल किया गया है, जिससे निगरानी क्षमता मजबूत होगी।
भारतीय तटरक्षक बल के लिए भारी-भरकम एयर कुशन व्हीकल (होवरक्राफ्ट) की खरीद को भी स्वीकृति दी गई है। इसका उपयोग तटीय गश्त, खोज और बचाव अभियान, टोही और लॉजिस्टिक सपोर्ट जैसे कार्यों में किया जाएगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 6.73 लाख करोड़ रुपये के 55 प्रस्तावों को आवश्यकता स्वीकृति (AoN) मिल चुकी है। वहीं, 2.28 लाख करोड़ रुपये के 503 पूंजीगत खरीद अनुबंधों पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं।
सूत्रों का कहना है कि किसी भी वित्तीय वर्ष में अब तक इतनी बड़ी संख्या में रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी और अनुबंध नहीं हुए हैं। इसे भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, यह निर्णय देश की सैन्य ताकत को आधुनिक बनाने और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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