डिजिटल जाल में फंसी ज़िंदगी
डॉ. प्रकाश चन्द्र ताम्रकार
विभागाध्यक्ष (इंटीरियर डेकोरेशन एंड डिजाइन)
शासकीय कन्या पालीटेक्निक, रायपुर (छ.ग.)


परिचय
1995 के आसपास चलित दूरभाष मोबाइल फोन का उपयोग जन सामान्य में प्रारंभ हुआ। सीमित सुविधाओं और महंगे कालिंग दर के चलते बहुत लोग इसका उपयोग नहीं करते थे ।तकनीकी विकास के साथ यह सर्वजन सुलभ हुआ और बातचीत के साथ अनेकानेक दैनिक क्रिया कलापों में भी इसका उपयोग होने लगा है ।भारतीय उपयोग कर्ता किशोर वय के युवा औसतन पांच घंटे से अधिक समय स्मार्ट फोन के स्क्रीन पर बिता रहे हैं । प्रतिदिन घंटों फोन चलाने की आदत अब लत बनते जा रही है, और इसके दुष्परिणाम आने लगे हैं ।
दुष्परिणाम
आटोमोड
इंटरनेट में मौजूद अनेक ज्ञान विहीन तत्वों की भरमार और मोटी खुराक कंटेंट ओबिसिटी का शिकार करने के लिए पर्याप्त है । कुछ इंटरनेट मंचों को ऐसे तैयार किया जाता है कि आप देर तक उसमें फंसे रहें, स्ट्राल करते रहें । कुछ नया दिख जाये तो यह आपको आगे कुछ और नया पाने के लिए उकसाता है । वास्तव में इसमें अधिकतर मूल्य विहीन सामग्री होती है, यह जानते हुए भी आप उन्हें देखते हैं । इस स्थिति को दिमाग की कंडीशनिंग हो जाना कहते हैं ।जिसे आप बार-बार देखते हैं, दिमाग उसे सहज अपना लेता है और कुछ समय बाद इसे आटोमोड में करते चला जाता है ।
टेकनेक
स्मार्ट फोन पर उंगलियां जरा भी रुकना नहीं चाहती और आपका मन नहीं मानता कि कुछ देर के लिए मोबाइल फोन को रख दें । भीतर से आवाज तो आती है कि बेकार इतना समय नष्ट किया पर यह आवाज कुछ ही देर में लुप्त हो जाती है । जर्नल ऑफ एप्लाइड फिजियोलॉजी के शोध से ज्ञात हुआ है कि यदि आप 13 घंटों तक बैठे रहते हैं तो कसरत एक्सरसाइज योग करने के लाभ समाप्त हो सकते हैं । फोन को लगातार देखते रहने के कारण गर्दन में अकड़न और दर्द महसूस होना ही टेक नेक है ।
अन्य बीमारियां
फोन के घंटों इस्तेमाल से 20-30 वर्ष के उम्र में ही युवा शारिरीक तौर पर गंभीर रूप से बीमार हो रहे हैं । जर्नल ऑफ फिजिकल थेरेपी साइंस के अनुसार सिर झुकाकर फोन देखने से स्पाइन की समस्या में विश्व भर में तेजी से वृद्धि हुई है । एक ही तरफ लेटकर घंटों मोबाइल चलाने से वजन का संतुलन बिगड़ता है और सुन्न होने या कंधे में अकड़न जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
फोन को देखने के लिए गर्दन को 45 अंश कोण पर झुकाते हैं तो कंधे आगे की ओर झुक सकते हैं और दबाव से गर्दन बाजूओ और हाथों मे दर्द हो सकता है । गर्दन का दर्द विकलांगता का चौथा प्रमुख कारण है । इसमें 30 प्रतिशत की दर से प्रति वर्ष वृद्धि हो रही है ।
एकाग्रता में कमी
विगत वर्षों में एक जगह ध्यान लगाने की अवधि बहुत तेजी से कम हुई है ।लगभग दो दशक पूर्व 24 मिनट तक एकाग्रता की क्षमता अब घट कर मात्र 8 सेकंड रह गई है। यह सबसे चंचल गोल्डफिश की 9 मिनट की एकाग्रता से भी कम है । भूलने की बीमारी बढ़ने लगी है और बेचैनी थकावट महसूस होते रहती है ।
उपाय
स्मार्टफोन बनाम स्मार्ट लाइफ: चुनें समझदारी से
कंटेंट देखने की समय सीमा निर्धारित कर इस पर अमल करना शुरू करें। इस आदत पर नियंत्रण करने में पुस्तकें पढ़ना सहायक होंगी।
प्रकृति के साथ समय बिताना शुरू करें जिससे आत्म अनुशासन में मदद मिलेगी ।
शोधपरक, गुणवत्तापूर्ण, शिक्षा प्रद, प्रेरक साईट का ही उपयोग करें।
कंटेंट देखने के प्रलोभनों से बचाव आप स्वयं कर सकते हैं ।
रचनात्मक कार्यों के लिए समय निकालें।
लेटकर, झुक कर, या ऐसी मुद्रा जो शरीर के अनुकूल नहीं है, मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करें । स्क्रीन आंखों से 20-30 सेंटीमीटर की दूरी पर रखें। गर्दन का झुकाव 15 अंश कोण से अधिक न हो । गर्दन सिर कंधे और पीठ सीध में रखें ।
कंधों को घुमाने, चिन को प्रेस करने और व्यायाम से ऊपरी हिस्सा मजबूत होता है । इससे कूबड़ निकलने की आशंका कम होती है ।
उपसंहार
विश्व में अनेक देशों में इस दिशा में कार्यवाही प्रारंभ हो चुका है ।चीन में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मिडिया बैन है । स्वीडन के शालाओं में मोबाइल प्रतिबंधित कर फिर से स्लेट काफी पुस्तकें जैसे पारंपरिक साधन उपयोग में लाये जाने की जानकारी आ रहे हैं ।
अब समय आ गया है कि बचपन मोबाइल के रील के भ्रामक दुनिया से निकाल कर रियल वास्तविक दुनिया में लौटने का । यह अधिक आनंददायक होगा । इससे कार्य क्षमता और उत्पादकता में भी वृद्धि होगी।
