कक्षा के एक फैसले से इतिहास तक: अंजलि मुंडा ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में जीता स्वर्ण

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रायपुर में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में अंजलि मुंडा ने जीता पहला महिला स्वर्ण

रायपुर, 26 मार्च 2026 — ओडिशा की 15 वर्षीय तैराक अंजलि मुंडा ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में इतिहास रचते हुए 200 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत लिया। 2 मिनट 39.02 सेकंड का समय निकालकर उन्होंने न केवल शीर्ष स्थान हासिल किया, बल्कि इस प्रतियोगिता की पहली महिला स्वर्ण पदक विजेता भी बनीं।

अंजलि की इस उपलब्धि की शुरुआत एक साधारण फैसले से हुई थी। वर्ष 2022 में स्कूल में खेल चयन के दौरान उन्होंने तैराकी को चुना था। उस समय यह उनके लिए सिर्फ एक सामान्य गतिविधि थी, लेकिन यही निर्णय आगे चलकर उनके करियर की दिशा तय कर गया।

ओडिशा के जाजपुर जिले के गहिरागड़िया गांव की रहने वाली अंजलि साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता एक स्थानीय फैक्ट्री में वैन चालक हैं। चार भाई-बहनों में सबसे छोटी अंजलि ने सीमित संसाधनों के बीच अपनी राह बनाई।

महज 10 वर्ष की उम्र में वे कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (KISS) से जुड़ीं। यहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा के साथ खेल प्रशिक्षण की सुविधा मिली। इसी संस्थान ने उनके खेल कौशल को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शुरुआत में अंजलि अपनी बड़ी बहन से प्रेरित थीं, जो तीरंदाजी में सक्रिय हैं। हालांकि, उन्होंने अलग रास्ता चुनते हुए तैराकी को अपनाया। उनके इस फैसले ने जल्द ही सकारात्मक परिणाम देना शुरू कर दिया।

तैराकी शुरू करने के एक साल के भीतर ही अंजलि ने स्थानीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीत लिया। इस सफलता ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया और उन्हें बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिली।

अंजलि अपनी उपलब्धियों का श्रेय अपने कोचों और खेल मंत्रालय की ‘अस्मिता लीग’ पहल को देती हैं। वर्ष 2024 में संभलपुर में आयोजित अस्मिता लीग में उन्होंने दो रजत पदक जीते थे। इसके बाद गुवाहाटी में आयोजित ईस्ट जोन अस्मिता स्विमिंग लीग में भी उन्होंने दो रजत पदक अपने नाम किए।

लगातार बेहतर प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में उनका प्रदर्शन इसी निरंतर मेहनत का परिणाम माना जा रहा है।

हालांकि स्वर्ण पदक जीतने के बाद भी अंजलि पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनका ध्यान अब अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय को सुधारने पर है। उनका मौजूदा पर्सनल बेस्ट 2 मिनट 25 सेकंड है, जिसे वे जल्द ही बेहतर करना चाहती हैं।

प्रतियोगिता के दौरान लगातार यात्रा और थकान के बावजूद उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। यह उनके अनुशासन और मानसिक मजबूती को दर्शाता है।

अब अंजलि आगामी स्पर्धाओं की तैयारी में जुट गई हैं। वे 50 मीटर बैकस्ट्रोक, 100 मीटर बैकस्ट्रोक और 200 मीटर इंडिविजुअल मेडली में भाग लेंगी। इन प्रतियोगिताओं में भी उनका लक्ष्य अपने प्रदर्शन को और बेहतर करना है।

अंजलि मुंडा की सफलता यह दिखाती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर प्रतिभा किसी भी पृष्ठभूमि से उभर सकती है। उनकी उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत जीत है, बल्कि यह देशभर के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा भी है।

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