
नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri कतर की दो दिवसीय यात्रा पर दोहा पहुंचे हैं। इस दौरे का मुख्य फोकस भारत के लिए एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की सप्लाई सुनिश्चित करना है।
क्यों अहम है यह दौरा
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। कतर, जो दुनिया के बड़े एलएनजी सप्लायर देशों में शामिल है, वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने से सप्लाई प्रभावित हुई है।
भारत पर क्या असर
हालांकि कतर द्वारा लागू ‘फोर्स मेजर’ में भारत का नाम शामिल नहीं है, फिर भी स्थिति को देखते हुए भारत सतर्क है और सप्लाई बनाए रखने के लिए बातचीत कर रहा है।
क्या है स्थिति
कतर की करीब 17% एलएनजी निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है
- कुछ प्लांट्स को नुकसान, उत्पादन में गिरावट
- मरम्मत में 3 से 5 साल लग सकते हैं
भारत की रणनीति
भारत एक तरफ कतर से बातचीत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर
- अमेरिका
- ऑस्ट्रेलिया
- रूस
जैसे देशों से वैकल्पिक सप्लाई के विकल्प भी तलाश रहा है।
आगे की योजना
भारत ने 2025 में करीब 25.5 मिलियन टन LNG आयात किया था और सरकार का लक्ष्य 2030 तक ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी 15% तक बढ़ाना है।
कुल मिलाकर, यह दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।



















