राजस्थान में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र घोटाला: बीजेपी विधायक की बेटी का भी नाम..

0
41

38 कर्मचारियों के सर्टिफिकेट फर्जी, सैकड़ों डॉक्टर भी घेरे में

जयपुर  राजस्थान में दिव्यांग कोटे के तहत सरकारी नौकरी पाने वालों के बीच फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र का बड़ा घोटाला सामने आया है। सबसे बड़ा खुलासा भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत (ब्यावर) की बेटी कंचन चौहान के मामले में हुआ है, जिन्होंने आरएएस भर्ती 2024 में 40% श्रवण विकलांगता का दावा किया था।

हालांकि सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज (SMS) की मेडिकल जांच में यह दावा झूठा निकला। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंचन को सुनने में किसी तरह की गंभीर समस्या नहीं है — उनकी विकलांगता केवल 8% पाई गई।

फर्जी प्रमाण पत्र से बनीं तहसीलदार

कंचन चौहान ने इसी फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर आरएएस भर्ती परीक्षा में भाग लिया था। शिकायत मिलने के बाद मामला सीएम पोर्टल के जरिए एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) तक पहुंचा।

3 सितंबर को जांच के लिए बुलाने पर वह नहीं आईं, लेकिन 14 अक्टूबर को SMS मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश होने पर उनकी श्रवण विकलांगता का दावा झूठा साबित हुआ। हालांकि जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद अब तक किसी विभागीय कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।

66 में से 38 कर्मचारियों के प्रमाण फर्जी

एसओजी जांच में 66 सरकारी कर्मचारियों को बुलाया गया, जिनमें से 43 पहुंचे। जांच में पाया गया कि केवल 6 के प्रमाण पत्र सही, जबकि 38 के फर्जी हैं। बाकी 23 कर्मचारी जांच में शामिल ही नहीं हुए। सबसे अधिक मामले “बधिर श्रेणी” में सामने आए हैं। एसओजी की रिपोर्ट पर 24 विभागाध्यक्षों को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।

फिलहाल, पीएचईडी विभाग की कर्मचारी कविता यादव को फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने के आरोप में बर्खास्त किया गया है और जयपुर के सदर थाने में एफआईआर भी दर्ज की गई है।

डॉक्टर भी घेरे में, 100 से अधिक पर होगी कार्रवाई

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि फर्जी प्रमाण पत्रों पर 100 से अधिक डॉक्टरों ने हस्ताक्षर किए थे। सरकार ने इन सभी की पहचान कर ली है। चिकित्सा शिक्षा विभाग को एसओजी की रिपोर्ट सौंप दी गई है और अब विभागीय कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर इकबाल खान ने बताया कि अब नई नियुक्तियों से पहले संभाग स्तर पर दोबारा मेडिकल जांच कराई जा रही है और पुराने कर्मचारियों के प्रमाण पत्रों का भी सत्यापन होगा।

जांच में देरी का कारण – एक मशीन पर निर्भरता

एसएमएस अस्पताल में श्रवण विकलांगता की जांच के लिए केवल एक ऑडियोमेट्री मशीन है। इस पर अपॉइंटमेंट के लिए छह महीने तक का इंतजार करना पड़ता है, जिसके कारण बड़ी संख्या में जांच लंबित पड़ी है।

0Shares

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here