रायपुर । कांग्रेस के पूर्व विधायक गुलाब कमरो का SIR फार्म न भरने और उनका नाम मतदाता सूची में गलत जिले में दर्ज होने के बाद छत्तीसगढ़ में SIR प्रक्रिया पर सियासत गर्म हो गई है। कांग्रेस ने इसे गंभीर तकनीकी त्रुटि बताते हुए मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाया है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने भी इस मामले को प्रमुखता से उठाया है।
कांग्रेस का आरोप: पूर्व विधायक का नाम ही सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिक का क्या?
छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जब पूर्व विधायक गुलाब कमरो का ही नाम उनके क्षेत्र की मतदाता सूची से काटा जा रहा है, तो आम मतदाता की सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पार्टी ने इसे “मामूली गलती नहीं, बल्कि गंभीर प्रणालीगत समस्या” बताया।
गुलाब कमरो ने लगाया तकनीकी गड़बड़ी का आरोप
भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने दावा किया कि उनका SIR फार्म तकनीकी त्रुटि के कारण नहीं भरा गया। उनका आरोप है कि ऑनलाइन अपडेट के दौरान उनका नाम गलत तरीके से रायगढ़ जिले में दर्ज हो गया, जबकि वे मनेंद्रगढ़ ब्लॉक के साल्ही गांव के मतदाता हैं। उन्होंने बताया कि जिला निर्वाचन कार्यालय को सूचना देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया, जिसके बाद उन्होंने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से शिकायत की है।
मंत्री श्याम बिहारी का पलटवार: कांग्रेस बेवजह मुद्दा बना रही है
राज्य के मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूर्व विधायक कमरो मनेंद्रगढ़ और अपने गांव दोनों जगह रहते हैं, इसलिए एक स्थान से नाम कटने की संभावना हो सकती है। उन्होंने कहा, “पूर्व विधायक का नाम कटना संभव ही नहीं, कांग्रेस बिना कारण के विरोध कर रही है।”
यह प्रारंभिक सूची है, दावा-आपत्ति में होगा समाधान: डिप्टी सीएम अरुण साव
डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने की एक तय प्रक्रिया होती है। अभी प्रारंभिक सूची का प्रकाशन होना है, इसके बाद नागरिक दावे और आपत्तियां दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी त्रुटि को प्रक्रिया के अनुसार सुधारा जाएगा।
बीजेपी का निशाना: कांग्रेस SIR पढ़ती भी नहीं, बिना समझे विवाद खड़ा कर रही है
रायपुर में बीजेपी प्रवक्ता विजय शंकर मिश्रा ने कांग्रेस पर हमलावर होते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह संविधान में परिभाषित है और सही तरीके से लागू हो रही है। उन्होंने कहा, “कांग्रेसी नेता रिकॉर्ड में निवासरत नहीं होंगे, तो नाम नहीं मिलेगा। यह निर्वाचन आयोग का विषय है। दावा-आपत्ति का समय आएगा, जहां गलतियों को सुधारा जा सकता है।”
छत्तीसगढ़ में SIR प्रक्रिया को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक टकराव का नया केंद्र बन चुका है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने के आसार हैं।






















