सुकमा कनेक्ट 2.0 को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान, देश के 14 चयनित प्रस्तावों में मिली जगह

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भारत सरकार ने दी 1.17 करोड़ रुपये की मंजूरी, 24 घंटे बहुभाषी कॉल सेंटर और मोबाइल सेवा वैन से दूरस्थ गांवों तक पहुंचेंगी नागरिक सुविधाएं


रायपुर। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों तक शासकीय योजनाओं और नागरिक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में सुकमा जिले की पहल ‘सुकमा कनेक्ट 2.0’ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ने इस पहल को ‘स्टेट कोलैबोरेशन इनिशिएटिव’ के तहत देश के 14 चयनित प्रस्तावों में शामिल करते हुए 1.17 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दी है।

प्रशासन द्वारा मौजूदा केंद्रीकृत निगरानी एवं नियंत्रण केंद्र सेवा का विस्तार करने के उद्देश्य से ‘सुकमा कनेक्ट (सीएमसीसी) 2.0’ का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों तक नागरिक सुविधाएं पहुंचाना और सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना है।

24 घंटे बहुभाषी कॉल सेंटर से मिलेगी सहायता

‘सुकमा कनेक्ट 2.0’ के तहत स्थानीय बोलियों में चौबीसों घंटे सहायता उपलब्ध कराने के लिए बहुभाषी कॉल सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा दो मोबाइल सेवा वैन दूरस्थ गांवों तक पहुंचकर आधार सहित अन्य नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इससे अंदरूनी क्षेत्रों के ग्रामीणों को जरूरी कामों के लिए लंबी दूरी तय करने की परेशानी कम होगी।

40 हजार से अधिक कॉल, हजारों लोगों को मिला लाभ

सुकमा जिले में मार्च 2026 से संचालित केंद्रीकृत निगरानी एवं नियंत्रण केंद्र (सीएमसीसी 1.0) के माध्यम से अब तक 40 हजार से अधिक फोन कॉल किए जा चुके हैं। इस पहल के तहत 10,078 आयुष्मान कार्ड और 11,103 नए मतदाता पहचान पत्र बनाए गए हैं। वहीं, 5,788 आधार नामांकन और 27,391 बायोमेट्रिक अपडेट किए गए हैं।

आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में 452 महिला स्व-सहायता समूहों का गठन किया गया है। इसके माध्यम से 4,745 परिवारों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ा गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाना और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना है।

198 आवासीय विद्यालयों और आश्रमों की होगी डिजिटल निगरानी

परियोजना के तहत शिक्षा व्यवस्था की निगरानी को भी मजबूत किया जाएगा। जिले के 198 आवासीय विद्यालयों और आश्रमों में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू की जाएगी। इसके साथ ही स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान और उनकी निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ा जा सके।

कलेक्टर स्तर पर बनेगा डिजिटल डैशबोर्ड

नागरिक सेवाओं, शासकीय योजनाओं और शिक्षा संबंधी गतिविधियों की एकीकृत निगरानी के लिए कलेक्टर स्तर पर डिजिटल डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा। इसके माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन और सेवाओं की उपलब्धता पर एक ही मंच से नजर रखी जा सकेगी।

कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन और जिला पंचायत के सीईओ मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में सुकमा जिले में मार्च 2026 से सीएमसीसी 1.0 का संचालन किया जा रहा है। अब ‘सुकमा कनेक्ट 2.0’ के माध्यम से इस व्यवस्था का विस्तार कर दूरस्थ आदिवासी अंचलों में तकनीक आधारित प्रशासनिक सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।

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