NEET पेपर लीक रोकने के AI प्लान पर आनंद कुमार को ऐतराज, बोले- गरीब छात्रों के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें

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सुपर 30 के संस्थापक ने नंदन नीलेकणि के प्रस्ताव पर उठाए सवाल, कहा- तकनीक की मदद और अंतिम फैसला उसी पर छोड़ने में बड़ा अंतर


नई दिल्ली । NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार ने चिंता जताई है। उन्होंने इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि के उस प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं, जिसमें बड़े डिजिटल प्रश्न बैंक से परीक्षा के अंतिम समय में AI की मदद से प्रश्नपत्र तैयार करने और कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

आनंद कुमार का कहना है कि परीक्षा में सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए ऐसी व्यवस्था नहीं बननी चाहिए, जिससे गरीब, ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के सामने नई बाधाएं खड़ी हो जाएं।

तीन प्रमुख वजहों से जताई असहमति

आनंद कुमार ने नंदन नीलेकणि के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके प्रस्ताव से विनम्रतापूर्वक असहमति जताई। उन्होंने इसके पीछे तीन प्रमुख कारण बताए।

पहली वजह: ग्रामीण छात्रों के पास कंप्यूटर की सीमित पहुंच

आनंद कुमार के अनुसार, देश के दूरदराज के गांवों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लाखों प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के पास कंप्यूटर की पर्याप्त सुविधा नहीं है। ऐसे में यदि पूरी परीक्षा व्यवस्था कंप्यूटर आधारित कर दी जाती है, तो इन छात्रों को परीक्षा देने में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

दूसरी वजह: परीक्षा केंद्रों की सुविधाओं में असमानता

उन्होंने सवाल उठाया कि दूरदराज के क्षेत्रों में परीक्षा केंद्र बनाए जाने पर क्या वहां महानगरों जैसी तकनीकी सुविधाएं, संसाधन और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सकेगी। उनके मुताबिक, परीक्षा प्रणाली में बदलाव करते समय क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करना भी जरूरी है।

तीसरी वजह: AI से तैयार प्रश्नपत्र में गलतियों की आशंका

आनंद कुमार ने प्रश्नपत्रों में गलतियों की संभावना को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि मौजूदा परीक्षाओं में भी कभी-कभी सवालों में त्रुटियां सामने आती हैं। ऐसे में बड़े प्रश्न बैंक से AI द्वारा अंतिम समय में प्रश्न चुने जाने पर उनकी शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए।

‘मैं तकनीक या AI का विरोधी नहीं हूं’

आनंद कुमार ने स्पष्ट किया कि वह तकनीक या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विरोधी नहीं हैं। उनका मानना है कि AI शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव ला सकता है और प्रश्नपत्र तैयार करने में विशेषज्ञों की मदद कर सकता है। हालांकि, उन्होंने तकनीक से सहायता लेने और अंतिम निर्णय उसी पर छोड़ देने के बीच अंतर बताया।

उन्होंने कहा, “लेकिन सहायता करने और अंतिम निर्णय लेने में बहुत बड़ा अंतर है।”

पेपर लीक रोकने से पहले मौजूदा व्यवस्था की खामियां दूर करने पर जोर

आनंद कुमार के मुताबिक, पेपर लीक रोकने के लिए नई तकनीक लागू करने से पहले मौजूदा परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों को दूर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नकल और पेपर लीक रोकने के प्रयासों में ऐसी व्यवस्था नहीं बननी चाहिए, जिससे गरीब और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए परीक्षा देना और कठिन हो जाए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षा का उद्देश्य केवल तकनीक की क्षमता दिखाना नहीं, बल्कि देश के हर कोने में मौजूद प्रतिभा को पहचानने का समान अवसर देना है। प्रश्नपत्र में एक छोटी-सी गलती भी किसी छात्र के अंकों, भविष्य और सपनों को प्रभावित कर सकती है।

क्या है नंदन नीलेकणि का प्रस्ताव?

नंदन नीलेकणि ने पेपर लीक की समस्या से निपटने के लिए विशाल डिजिटल प्रश्न बैंक तैयार करने और परीक्षा के दिन उसमें से प्रश्न चुनकर अंतिम समय में प्रश्नपत्र तैयार करने का सुझाव दिया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पहले से तैयार प्रश्नपत्रों के लीक होने की आशंका कम करना है। इसके साथ ही कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं के लिए देशभर में परीक्षा केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

परीक्षा सुधार को लेकर बहस तेज

आनंद कुमार की आपत्तियों ने परीक्षा सुधार को लेकर एक अहम सवाल खड़ा किया है कि पेपर लीक रोकने के लिए AI और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किस तरह किया जाए, ताकि परीक्षा की सुरक्षा मजबूत होने के साथ सभी विद्यार्थियों को समान अवसर भी मिल सकें। तकनीक के इस्तेमाल के साथ प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता, परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता और ग्रामीण छात्रों की जरू

रतों को ध्यान में रखना भी महत्वपूर्ण होगा।

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