दंतेवाड़ा में निःशुल्क दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण शिविर का शुभारंभ, 768 लोगों को मिलेगा लाभ

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गृह मंत्री अमित शाह ने वर्चुअल माध्यम से किया शिविर के दूसरे चरण का उद्घाटन, नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता पर दिया जोर


दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वर्चुअल माध्यम से शिविर का उद्घाटन करते हुए कहा कि सरकार का संकल्प है कि नक्सल हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति तक सहायता पहुंचे, उसका समुचित पुनर्वास हो और वह आत्मविश्वास तथा स्वाभिमान के साथ जीवन में आगे बढ़ सके।

भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और एनएसई फाउंडेशन द्वारा प्रायोजित इस शिविर का आयोजन जिला प्रशासन के सहयोग से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नक्सल हिंसा से प्रभावित दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन को सुगम बनाना तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करना है।

नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों का पुनर्वास सरकार की जिम्मेदारी: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद को समाप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उससे उत्पन्न पीड़ा और अभाव को दूर कर बस्तर को फिर से खुशहाल बनाना भी सरकार की जिम्मेदारी है। नक्सल हिंसा में कई लोगों ने अपने हाथ-पैर खोए हैं, जबकि कुछ की देखने और सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है। ऐसे प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचकर उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना साझा जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम हाथ किसी व्यक्ति को दोबारा काम करने का सामर्थ्य देता है, जबकि कृत्रिम पैर उसे फिर से अपने पैरों पर खड़े होने का विश्वास प्रदान करता है। व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, स्मार्ट वॉकिंग स्टिक, कृत्रिम अंग और कैलीपर जैसे उपकरण दिव्यांगजनों के दैनिक जीवन को आसान बनाने में मददगार होंगे।

अमित शाह ने इस पहल के लिए छत्तीसगढ़ सरकार, जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और सहयोगी संस्थाओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों को पुनर्वास, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराना सरकार का संकल्प है।

तीन जिलों के 768 लोगों को मिलेगा लाभ

इस शिविर में दंतेवाड़ा जिले के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा जिले के 62 लोगों को सहायक उपकरणों से लाभान्वित किया जा रहा है। कुल 768 लाभार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार उपकरण उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

इन उपकरणों से दिव्यांगजनों को आवागमन, दैनिक गतिविधियों और आजीविका से जुड़े कार्यों में सुविधा मिलने की उम्मीद है। शिविर का उद्देश्य केवल उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों के आत्मविश्वास को बढ़ाकर उन्हें सामाजिक जीवन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना भी है।

बस्तर में बदलाव की पहल का किया उल्लेख

केंद्रीय गृह मंत्री ने बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम और नियद नेल्लानार जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी गोलियों और बम धमाकों की आवाजें सुनाई देती थीं, वहां आज हजारों युवा खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। बस्तर पंडुम के माध्यम से जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को मंच मिल रहा है, जबकि नियद नेल्लानार योजना के जरिए दूरस्थ गांवों तक बुनियादी सुविधाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वीर जवानों को किया नमन

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शारदीय नवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए मां दंतेश्वरी से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों और नक्सली हिंसा में जान गंवाने वाले ग्रामीणों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

कृत्रिम पैर लगने से फिर चलने की उम्मीद

शिविर में पहुंचे लाभार्थियों ने सहायक उपकरण मिलने पर खुशी जताई। सुकमा के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद पैर काटना पड़ा। उन्होंने कहा कि कृत्रिम पैर लगने के बाद अब वे फिर से दोनों पैरों से चल पा रहे हैं और देश की सेवा के लिए तैयार हैं।

बीजापुर जिले के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने बताया कि वर्ष 2012 में चिंतावागु नदी में मछली पकड़ने जाते समय माओवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट में उनका दायां पैर क्षतिग्रस्त हो गया था। बाद में पैर काटना पड़ा। शिविर में कृत्रिम पैर मिलने के बाद दोबारा चल पाना उनके लिए यादगार अनुभव है।

वहीं, दंतेवाड़ा जिले के जावंगा और मेटापाल के जन्मजात अस्थिबाधित अजय सोरी और कोसी पोडियाम को ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि इससे आने-जाने में सुविधा होगी और उन्होंने इस सहायता के लिए सरकार का आभार जताया।

शिविर के माध्यम से नक्सल हिंसा और दिव्यांगता से प्रभावित लोगों को जरूरी उपकरण उपलब्ध कराकर उन्हें अधिक स्वतंत्र, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने में सहायता देने का प्रयास किया जा रहा है।

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