पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मामले में विशेष लोक अभियोजक रहे उज्ज्वल निकम, केरल से भारतीय जनता पार्टी के नेता सी सदानंदन मास्टर और इतिहासकार मीनाक्षी जैन को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया है। इन चार नामों में से आपके लिए सी. सदानंदन मास्टर का नाम भले जाना-पहचाना नहीं हो लेकिन उनके सामाजिक कार्य उनकी पहचान हैं। साथ ही उनका जीवन अन्याय के आगे नहीं झुकने की भावना का प्रतीक भी है। वामपंथी हिंसा और धमकी के आगे नहीं झुक कर राष्ट्र के विकास के प्रति अपने जज्बे को बरकरार रखने वाले सी. सदानंदन मास्टर पूरे देश के लिए बड़ी प्रेरणा हैं।


हम आपको बता दें कि केरल के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में जिन व्यक्तित्वों ने जनता के बीच संगठन, चेतना और संघर्ष की लौ जगाई, उनमें सी. सदानंदन मास्टर का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। वे केवल एक शिक्षक नहीं हैं, बल्कि जीवनपर्यंत एक ऐसे संगठक, विचारक और मार्गदर्शक रहे हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उससे जुड़े संगठनों के माध्यम से केरल में राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूती दी। उनका जीवन संघर्ष, तपस्या और आदर्शों के लिए समर्पित था, और आज भी वे केरल के राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं।
सी. सदानंदन मास्टर का जन्म केरल के कन्नूर जिले के एक साधारण परिवार में हुआ। बाल्यकाल से ही वे अत्यंत संयमी, मेहनती और अनुशासनप्रिय थे। शिक्षा के प्रति उनकी रुचि प्रारंभ से ही गहरी थी। उन्होंने शिक्षक के रूप में अपने कॅरियर की शुरुआत की और बहुत जल्द गांव-समाज में एक आदर्श गुरु के रूप में प्रसिद्ध हो गए। सदानंदन मास्टर का जीवन तब मोड़ लेता है, जब वे युवावस्था में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संपर्क में आते हैं। संघ के ‘एकात्म मानववाद’, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भारतीयता के विचार ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। शिक्षक के दायित्व के साथ-साथ वे धीरे-धीरे संगठनात्मक कार्यों में भी सक्रिय हो गए। उनका घर और स्कूल ही संघ की गतिविधियों का केंद्र बन गया था। वे विद्यालयों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों की शिक्षा को प्राथमिकता देते थे।
हम आपको बता दें कि केरल के कन्नूर और आसपास के क्षेत्र वामपंथी राजनीतिक हिंसा के लिए कुख्यात रहे हैं। 1994 में सी. सदानंदन मास्टर पर एक क्रूर और अमानवीय हमला हुआ। मार्क्सवादी विचारधारा से जुड़े हिंसक कार्यकर्ताओं ने उनके दोनों पैर काट डाले थे। यह हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विचारधारा, शिक्षा और संगठन के प्रति समर्पण पर हमला था। लेकिन सदानंदन मास्टर ने इस हिंसा के आगे कभी घुटने नहीं टेके। उन्होंने उस घटना को अपने जीवन का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत माना। उन्होंने स्वयं कहा था कि मेरे पैर काट दिए, लेकिन मेरे विचार और हौसले कोई नहीं काट सकता।
हम आपको बता दें कि इस घटना के बाद वे पूरे केरल और देशभर में ‘साहस और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक’ के रूप में पहचाने जाने लगे। वे पूरी ताकत के साथ संगठन के कार्यों में जुट गए थे। उन्होंने शारीरिक अपंगता को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने हजारों युवाओं को राष्ट्र के प्रति समर्पण, सेवा और संगठन के मार्ग पर चलाया। वामपंथी हिंसा से त्रस्त केरल के लोगों में उनके प्रति विशेष सम्मान और श्रद्धा पैदा हुई। वे अनेक युवाओं के लिए जीते-जागते आदर्श बन गए कि किस तरह विचार और ध्येय के लिए तन, मन, जीवन सब कुछ समर्पित किया जाता है।
हम आपको बता दें कि सदानंदन मास्टर ने संघ और उससे जुड़े संगठनों में संगठनकर्ता, प्रेरक वक्ता और मार्गदर्शक के रूप में वर्षों तक कार्य किया। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), सेवा भारती, विद्या भारती और भाजपा में सक्रिय रहे हैं। वे सदैव युवाओं को प्रेरित करते रहे हैं कि शिक्षा केवल नौकरी पाने के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए होनी चाहिए। उनकी वाणी में इतना प्रेरक तेज और सच्चाई होती है कि श्रोता स्वतः उनके विचारों से जुड़ जाते हैं।
सदानंदन मास्टर सादगी, संयम और अनुशासन के प्रतीक हैं। उन्होंने कभी पद, प्रतिष्ठा या प्रचार नहीं चाहा। वे हमेशा संघ और समाज के अंतिम पंक्ति के कार्यकर्ता की तरह कार्यरत रहते हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि सच्चा नेतृत्व नारे या भाषणों से नहीं, बल्कि अपने आचरण और संघर्ष से पैदा होता है। आज केरल में जो हजारों, लाखों युवा राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ खड़े हैं, समाज सेवा और संगठन में लगे हैं, उसके पीछे सदानंदन मास्टर जैसे व्यक्तित्वों की दशकों की तपस्या और प्रेरणा है। वे एक जीवित उदाहरण बनकर यह साबित कर पाने में सफल रहे हैं कि हिंसा से विचार नहीं मारे जा सकते।
बहरहाल, सी. सदानंदन मास्टर का जीवन केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि विचार, साहस और सेवा के आदर्शों की जीवंत गाथा है। उनके दोनों पैर काटे गए, लेकिन उनके विचार केरल में हजारों लोगों के जरिए समाज निर्माण में लगे हैं। अब तो वह राज्यसभा के सदस्य मनोनीत हो गये हैं और निश्चित ही देश को उनके विचारों और अनुभवों का लाभ मिलेगा। सी. सदानंदन मास्टर का जीवन यह भी संदेश देता है कि “शरीर को तोड़ना आसान है, लेकिन विचार और आत्मबल को कोई नहीं झुका सकता।” सी. सदानंदन मास्टर केरल ही नहीं, पूरे भारत में साहस, राष्ट्रभक्ति और संगठन के प्रतीक के रूप में देखे जाते हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि सी. सदानंदन मास्टर केरल के कन्नूर ज़िले में 2016 और 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव भी लड़ चुके थे।
