सलिहाघाट पुल बना हादसों का अड्डा: गड्ढे और निकले सरिए दे रहे मौत को न्योता

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स्थानीयों ने उठाई मरम्मत की मांग, प्रशासनिक लापरवाही पर जताई नाराजगी

बिलाईगढ़ | बिलाईगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सलिहाघाट में करोड़ों की लागत से बने पुल की हालत इन दिनों बेहद खस्ता हो चुकी है। पुल में जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और सरिए-छड़ें बाहर निकलकर राहगीरों के लिए जानलेवा खतरा बन चुकी हैं। इस पुल से गुजरने वाले स्थानीय लोगों और यात्रियों में रोष है और वे जल्द से जल्द पुल की मरम्मत की मांग कर रहे हैं।

सरकारी दावों की खुली पोल

करीब 1 किलोमीटर लंबे सलिहाघाट सेतु-पुल का निर्माण ब्रिज-सेतु योजना के तहत किया गया था, जिसे बिलासपुर डिवीजन ने बनवाया था। लेकिन आज यह पुल सरकारी दावों की हकीकत उजागर कर रहा है। पुल की रेलिंग जर्जर हो चुकी है और कई जगहों पर सरिए पूरी तरह बाहर आ गए हैं। सड़क पर बने गहरे गड्ढे न सिर्फ दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं, बल्कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।

 

‘दिखावटी मरम्मत’, स्थायी हल नहीं

स्थानीय लोगों ने बताया कि समय-समय पर पुल की मरम्मत होती है लेकिन सिर्फ दिखावे के लिए। कुछ ही दिनों में सीमेंट उखड़ने लगता है और पुल फिर से पहले जैसी हालत में आ जाता है। लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और विभाग मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं।

प्रशासनिक अनदेखी पर गुस्सा

पुल के इस जर्जर हालात को लेकर जनता का गुस्सा प्रशासन और संबंधित विभाग पर फूटा है। लोगों ने कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस पुल से रोजाना सैकड़ों की संख्या में वाहन गुजरते हैं, और किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

क्या सुध लेगा प्रशासन?

गौरतलब है कि पुल की देखरेख और मरम्मत की जिम्मेदारी बिलासपुर डिवीजन की है। अब देखना यह होगा कि मीडिया में खबर आने के बाद विभाग और प्रशासन क्या कार्रवाई करता है। स्थानीयों की मांग है कि पुल की तत्काल मरम्मत की जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके और दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

फिलहाल, सलिहाघाट पुल की हालत ‘मरम्मत नहीं तो दुर्घटना तय’ जैसी बन चुकी है।

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