रायपुर । खैरागढ़ स्थित मनोहर गौशाला आज देशभर की उन मिसालों में शामिल हो रहा है, जहां गायों के लिए प्राकृतिक वातावरण में संरक्षण और संवर्धन को प्राथमिकता दी जा रही है। यहां 4 हजार से अधिक पेड़ों की हरियाली विकसित की गई है। इसे द्वापर युग की तर्ज पर प्राकृतिक गौशाला बनाया जा रहा है।


मनोहर गौशाला के ट्रस्टी डॉ. अखिल जैन (पदम डाकलिया) ने बताया कि गौशाला परिसर में निर्माणाधीन चंद्रमणी गौ चिकित्सालय एवं रिसर्च सेंटर के पास 700 अशोक के पौधे रोपे जाएंगे। इस मानसून में इन पौधों का रोपण किया जाएगा। इसके साथ ही साढ़े 4 हजार से अधिक पौधों के जंगल से गौशाला सुशोभित हो जाएगा। ये न केवल पर्यावरणीय संतुलन को बनाएंगे, बल्कि पशुओं को छांव व शांति का वातावरण भी प्रदान करेंगे। यह पहल अपने आप में एक हरित क्रांति का रूप ले रही है। बता दें कि गौशाला में तालाब का निर्माण भी पूर्ण हो चुका है, ताकि गौवंशों के लिए जल की समुचित व्यवस्था हो सके। साथ ही पशु चिकित्सालय का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। आने वाले दो सालों में चिकित्सालय भी बनकर तैयार हो जाएगा।
आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में भी अग्रसर
मनोहर गौशाला में गोमूत्र और गोबर से जैविक खाद व प्राकृतिक कीटनाशक (पेस्टिसाइड) का निर्माण भी किया जा रहा है, जो रासायनिक उर्वरकों का विकल्प बनकर आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में प्रेरणादायक कदम है। इस अभिनव प्रयोग पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के वैज्ञानिकों की टीम फील्ड ट्रायल और रिसर्च कर रही है। इस नवाचार का पेटेंट भी हो चुका है। इससे यह पहल न केवल क्षेत्रीय, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त कर रही है। डॉ. जैन ने बताया कि मनोहर गौशाला आज एक ऐसा केंद्र बनता जा रहा है, जहां आत्मनिर्भर गौशाला के माध्यम से आत्मनिर्भर गांव की संकल्पना भी पूरी हो रही है।
