भावना बोहरा ने सदन में उठाया वन अधिकार पट्टा वितरण में देरी का मुद्दा

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सरकार ने जल्द समाधान का दिया आश्वासन


रायपुर । छत्तीसगढ़ विधानसभा में पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने वन अधिकार पट्टा वितरण में हो रही देरी का मुद्दा उठाते हुए सदन का ध्यानाकर्षण कराया। उन्होंने कहा कि वनांचल क्षेत्रों और विशेष रूप से बैगा आदिवासी समुदाय के किसानों को पट्टा नहीं मिलने से आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस पर आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने आश्वासन दिया कि प्रदेश में लंबित सभी प्रकरणों की दोबारा जांच कर जल्द से जल्द पात्र हितग्राहियों को वन अधिकार पट्टा प्रदान किया जाएगा।

विधायक भावना बोहरा ने कहा कि यदि जंगलों में रहने वाले लोग अपनी ही जमीन के मालिक नहीं बन पा रहे हैं तो वन अधिकार अधिनियम 2006 का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से जंगल की रक्षा करने वाले आदिवासी आज अपने अधिकार के लिए भटक रहे हैं। वन अधिकार पट्टा केवल जमीन का दस्तावेज नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक है।

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार वन अधिकार अधिनियम के तहत आवंटित कुल वन क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी देश में सबसे अधिक लगभग 43 प्रतिशत है। प्रदेश में अब तक करीब 5.05 लाख से अधिक वन अधिकार पट्टे वितरित किए जा चुके हैं, जो लगभग 97.63 लाख एकड़ भूमि को कवर करते हैं। मई 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार राज्य के 30 जिलों में 4.82 लाख व्यक्तिगत और 4,396 सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पट्टे दिए गए हैं।

भावना बोहरा ने बताया कि राज्य में अब तक 8.56 लाख से अधिक व्यक्तिगत वन अधिकार दावे प्राप्त हुए, जिनमें से लगभग 4.62 लाख यानी करीब 52 प्रतिशत दावों को विभिन्न कारणों से निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में 13 सितंबर 2005 से पहले के 75 वर्षों का रिकॉर्ड प्रस्तुत करना अनिवार्य होने के कारण आदिवासी और वनवासी परिवार दस्तावेज नहीं दे पाते, जिससे उनके आवेदन लंबित या निरस्त हो जाते हैं। इसके अलावा ग्राम सभा और प्रशासनिक समन्वय की कमी, तकनीकी बाधाएं, डिजिटलीकरण की धीमी प्रक्रिया तथा वन और राजस्व विभाग के बीच समन्वय की कमी भी मुख्य कारण हैं।

उन्होंने कबीरधाम जिला का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां करीब 10,519 आवेदन केवल इसलिए निरस्त कर दिए गए क्योंकि आवेदकों के पास 13 दिसंबर 2005 से पहले के कब्जे के प्रमाण नहीं थे। वहीं पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में 1,817 आवेदनों में से 216 आवेदन दस्तावेजों की कमी के कारण निरस्त हो गए और 1,601 पात्र हितग्राहियों को अब तक पूरी तरह पट्टा नहीं मिल पाया है।

भावना बोहरा ने कहा कि पट्टा नहीं मिलने के कारण किसानों का भूमि स्वामी के रूप में पंजीयन नहीं हो पाता, जिससे उन्हें फसल बीमा, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण आधारित योजनाओं और इनपुट सब्सिडी का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई जिलों में आदिवासी और वनवासी किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान भी नहीं बेच पा रहे हैं और उन्हें मजबूरी में निजी व्यापारियों को कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ रही है।

मंत्री रामविचार नेताम ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि राज्य में लंबित वन अधिकार पट्टा मामलों की दोबारा समीक्षा की जाएगी और जहां भी त्रुटियां हैं उन्हें दूर कर पात्र हितग्राहियों को जल्द पट्टा वितरित किया जाएगा, ताकि आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों के किसानों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके।

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