किस्सागोई: प्रायश्चित
भगवतीचरण वर्मा
लेखक परिचय: भगवतीचरण वर्मा
भगवतीचरण वर्मा (1903–1981) हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित उपन्यासकार और लेखक थे। उन्हें हिंदी साहित्य में यथार्थवादी लेखन के लिए...
आज की कविता
ज़िन्दग़ी
ज़िन्दगी किस मोड़ पर आकर खड़ी हो गई है?
चारों तरफ़ तन्हाई, तन्हाई और तन्हाई है।
हमसफ़र शब्द बेमानी हो गया है।
झूठ,छल,कपट का पर्याय...