बिजली अऩ्य जरूरी सुविधाओं की तरह जरूरी है, इसके बिना लोगों का काम नहीं चलता है। लोग चाहते हैं कि कम से कम यह तो महंगी नहीं होनी चाहिए, लेकिन लोगों के चाहने से क्या होता है, बिजली विभाग को लोगों की चिंता नहीं रहती है वह क्या चाहते हैं, बिजली बिल बढ़ने से उनको क्या परेशानी होती है। बिजली विभाग को अपनी चिंता रहती है कि उसे जो घाटा हो रहा है, उसकी पूर्ति कैसे की जाए।सबसे आसान तरीका यही होता है कि जनता की जेब से ही निकाल लिया जाए। बिजली विभाग चाहे तो जिन कारणों से उसे घाटा होता है, घाटा कम करने का प्रयास कर सकती है लेकिन बिजली विभाग ने ऐसा कभी नहीं किया है। उसकी लापरवाही, कुप्रबंधन,सरकार व सरकारी विभागों से पैसा न मिलना, बिजली उत्पादन से लेकर वितरण तक कई कारणों से उसे घाटा होता है, सरकार की योजनाओं के कारण घाटा होता है, वह और सरकार चाहें तो घाटा समाप्त न कर सकें लेकिन उसे कम तो कर सकते हैं, ऐसा कभी सुनने या पढ़ने में नहीं आता है कि बिजली विभाग व सरकार ने बिजली का घाटा कम करने को कोई गंभीर प्रयास किया है जिसके कारण राज्य में बिजली उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिली हो।


लोग तो चाहते हैं बिजली सस्ती न दे सरकार लेकिन बिजली दर बढ़ाए तो नहीं, बिजली दर को स्थिर रखें।राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पिछले पांच साल में सीएसपीडीसीएल की अनुशंसा पर बिजली दरों में औसत एक रुपए की बढ़ोतरी की है यानी सौ पैसे की बढ़ोतरी की है।११ जुलाई को फिर एक बार बिजली दर बढ़ाई गई है।बताया गया है कि इस बार औसत १.८९ प्रतिशत बिजली दर बढ़ाई गई है।इससे ६५ लाख घरेलू, ५ लाख कमर्शियल और कृषि क्षेत्र के ६ लाख उपभोक्ता प्रभावित होंगे।बिजली विभाग का कहना है कि उसे विद्युत की लागत एक यूनिट ७.२०पैसे पड़ती है,उसे घरेलू उपभोक्ताओं, पोहा मुरमुरा वालों को,अग्रिम भुगतान करने वालों को सस्ती बिजली देनी पड़ती है।इसके अलावा कई योजनाओं में सस्ती या मुफ्त बिजली देनी पड़ती है, जिसका पैसा सरकार देती है।
आंकड़ों के मुताबिक राज्य में २००३ में रमन सिंह सरकार के समय बिजली की दर ३.३० पैसे थी,रमन सिंह के कार्यकाल में इसे बढ़ाकर ६.४० पैसे कर दिया गया था।वर्तमान में यह ७.२० पैसे हैं। पिछले पांच साल में बिजली दर में बढोतरी देखी जाए तो २१-२२ में ६.१९ फीसदी,२२-२३ में २.३१ फीसदी,२३-२४ में कोई बढ़ाेतरी नहीं हुई, इसके बाद २४-२५में ८.३५फीसदी,२५-२६ में १.८९ फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। राज्य के सीएम साय का कहना है कि बिजली दर बढ़ोतरी का गरीबों व किसानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।उनका कहना है कि उनकी सरकार आने के बाद पहली बार बिजली की दरों में बढ़ोतरी हुई है जबकि कांग्रेस सरकार के समय २२-२३ में २.५० प्रतिशत,२४-२५ में ४.८८ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।उऩका कहना है कि इस तरह देखा जाए तो कांग्रेस के समय ७.३८ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा है कि १८ माह की भाजपा सरकार में बिजली बिल में तीसरी बार बढ़ोतरी हुई है।यह बढ़ोतरी आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालनेवाली है। उनका कहना है कि आज बिजली उप्तादन वाली किसी वस्तु की दर में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, फिर बिजली की दर में बढ़ोतरी क्यों की गई है।
उनका कहना है कि बिजली दर में बढ़ोतरी का कारण प्रदेश सरकार पर राज्य पावर कंपनी का बिजली बिल बकाया दस हजार करोड़ हो गया है,शासन द्वारा कई योजनाओं से विभाग को दी जाने वाली सब्सिडी का भुगतान सरकार बिजली विभाग को नहीं कर रही है। शासन के २३ विभागों का लगभग २३०० करोड़ रुपए बिजली बिल बकाया है।कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कहना हैकि डेढ़ साल में चौथी बार बिजली दल में बढ़ोतरी की गई है,यह जनता के साथ धोखा है। कांग्रेस इसका विरोध करती है और आनेवाले दिनों में इसके विरोध में प्रदर्शन करेगी। यह अच्छी बात है कि साय सरकार ने कांग्रेस के समय से चली आ रही चार सौ यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना को बंद नहीं किया है नहीं तो लोगों को और ज्यादा बिजली बिल देना पड़ता है।
