रायपुर । टैगोर नगर पटवा भवन में शनिवार को धर्मसभा में परम पूज्य उपाध्याय प्रवर युवा मनीषी श्री मनीष सागरजी महाराज ने कहा आज्ञा का पालन करना ही सच्चा धर्म है और इस सिद्धांत के अनुसार हमें हमेशा परमात्मा और गुरु की आज्ञा का आदर करना चाहिए। यह न केवल हमारे आध्यात्मिक विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि यह हमें जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। एक बार भी यदि आपके मन में कुछ गलत करने का भाव आ जाता है तो परमात्मा और गुरु के समझ अपनी बात रखने से यदि गलत भी करने जाओगे तो थम जाओगे। उपाध्याय भगवंत ने कहा कि देव गुरु द्वारा प्रदर्शित मार्गदर्शन में गहराई और ज्ञान होता है, जो हमें नैतिकता, संयम और आत्म- नियंत्रण की ओर अग्रसर करता है। जब हम उनके बताए मार्ग का अनुसरण करते हैं, तो हम न केवल अपने जीवन को एक सकारात्मक दिशा में ले जाते हैं, बल्कि अपने भीतर की आत्मा की शुद्धता को भी बढ़ाते हैं। इस प्रकार आज्ञा में चलना न केवल एक धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि यह हमारे जीवन को उद्देश्य प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण साधन भी है।


उपाध्याय भगवंत ने कहा कि हमें भोगों की असारता समझना है। हम भोगों के रहस्य को समझ नहीं पाते, एक भोग छोड़ते हैं और दूसरे भोग को पकड़ लेते हैं। भोग केवल क्षणिक संतोष प्रदान करते हैं और अंततः हमें असंतोष की ओर ले जाते हैं। हम अक्सर भोगों के गहरे रहस्यों को नहीं समझ पाते। इस चक्र में फंसकर हम सच्चे सुख और संतोष की खोज में भटकते रहते हैं। हम भोगों के असारता को समझकर वास्तविक विकास की ओर अग्रसर हो सकें ऐसा प्रयास करना चाहिए।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि कोई भी अच्छा काम करने के लिए साहस और सहनशीलता चाहिए। साहस होगा तभी आगे बढ़ पाओगे एवं साहस के साथ सहनशीलता ही आपको आगे बढ़ाती है। सहनशील व्यक्ति ही आगे बढ़ता है। जो सहनशील नहीं है वह पीछे रह जाता है। कई बार व्यक्ति साहस करता है लेकिन सहनशीलता नहीं होती है तो वह आगे बढ़ नहीं पाता है।
उपाध्याय भगवंत ने कहा कि त्याग और तप करना बहुत जरूरी है। त्याग और तप वस्तुओं को छोड़ना नहीं बल्कि अपने भीतर का आत्मविश्वास बढ़ाना है। हम ऐसा सोचते हैं कि जो अभी मिला उसको भोग लो, उसका सुख ले लो,आगे दुख नहीं आएगा। दुख ना आए ऐसा संभव नहीं, दुख आएंगे ही लेकिन दुखी नहीं होना है। सच्चाई यह है कि जैसा हम चाहते हैं वैसा होता नहीं तो ज्ञानी कहते हैं कि
जैसा होता है उसे स्वीकार कर लो। अच्छे से अच्छे की तैयारी करो और बुरे से बुरे के लिए तैयार रहो।
आत्मशोधन तप जारी,तपस्वी का हुआ बहुमान
श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ व चातुर्मास समिति, विवेकानंद नगर के अध्यक्ष श्याम सुंदर बैदमुथा ने बताया कि आत्मशोधन तप जारी है। आज सुभाष कोठारी के 11 उपवास की अनुमोदना की गई। रविवार को विशेष प्रवचन 8:45 बजे से 10:30 बजे तक होगा।
