गुरु घासीदास जयंती पर्व पर ग्राम भिनोदा में रक्तदान शिविर

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सारंगढ़-बिलाईगढ़ । बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती के पावन अवसर पर जिले के ग्राम भिनोदा में मानव सेवा को सर्वोच्च धर्म मानते हुए रक्तदान महादान की भावना के साथ एक प्रेरणादायी रक्तदान शिविर का आयोजन बुधवार को किया गया। इस शिविर ने सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदना का ऐसा संदेश दिया, जो लंबे समय तक समाज को प्रेरित करता रहेगा। इस रक्तदान शिविर में ग्राम भिनोदा सहित आसपास के गांवों के कुल 25 स्वैच्छिक रक्तदाताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रक्तदाताओं के चेहरों पर झलकता संतोष इस बात का सशक्त प्रमाण था कि किसी अनजान जीवन को बचाने का भाव ही सबसे बड़ा पुण्य और सच्ची मानवता है। जब समाज एकजुट होकर नेक उद्देश्य के लिए आगे आता है, तब हर कठिनाई स्वतः ही आसान हो जाती है।

ग्राम पंचायत भिनोदा द्वारा प्रतिवर्ष शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकारों को केंद्र में रखकर इस प्रकार के आयोजन किए जाते रहे हैं। यह रक्तदान शिविर भी बाबा गुरु घासीदास जी के मूल विचार — “मनखे-मनखे एक समान” और सेवा को ही सच्चा धर्म मानने की भावना को सजीव रूप में प्रस्तुत करता नजर आया। आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सामाजिक जागरूकता, आपसी एकता और संवेदनशील सोच से ही एक सशक्त और समरस समाज का निर्माण संभव है। कार्यक्रम ने यह भी रेखांकित किया कि रक्तदान केवल एक चिकित्सीय आवश्यकता नहीं, बल्कि यह जीवन रक्षा का संकल्प, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय कर्तव्य का प्रतीक है। भिनोदा के ग्रामीणों द्वारा किया गया यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा, ताकि वे भी गुरु घासीदास जी के मार्ग पर चलते हुए सेवा, करुणा और भाईचारे को अपने जीवन का उद्देश्य बनाएं।

रक्तदान करने वालों में प्रमुख रूप से ब्रिज किशोर अजगल्ले (सरपंच), संदीप टंडन (शिक्षक), फिरतुराम जांगड़े, गजेंद्र बंजारे, कामदेव अनंत, सोमनाथ भारद्वाज, तिलेन्दर अजय, भानु प्रताप अनंत, सहदेव कुमार अजगल्ले, जवाहिर लहरे, अमितेश बंजारे, राहुल बंजारे, प्रदीप सोनी, टेकराम सोनवानी (पंच), चित्रसेन घृतलाहरे (पत्रकार), तरुण सोनी (रोजगार सहायक), दूधराम सोनी, आशीष सोनी, हितेश टंडन, जय प्रकाश जांगड़े, उमेश टंडन, पारस जांगड़े, रविंद्रनाथ निराला, हरीश निराला एवं गोपी अजय (पत्रकार) शामिल रहे। यह आयोजन निःसंदेह ग्राम भिनोदा की सामाजिक चेतना, सामूहिक सहभागिता और सकारात्मक सोच का उज्ज्वल उदाहरण बनकर सामने आया, जिसने गुरु घासीदास जी के विचारों को कर्म के रूप में साकार किया।

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