रायपुर । राजधानी में गुरुवार को संयुक्त ईसाई समाज के सैकड़ों लोग कलेक्टोरेट पहुँचे और घरेलू प्रार्थना सभा संचालन के अधिकार की सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रार्थना सभा को लेकर उन पर लगाए जा रहे धर्मांतरण और जबरन बुलाने के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
ईसाई समाज ने ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन से मांग की कि प्रार्थना सभाओं में उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो समाज के लोग अर्धनग्न प्रदर्शन, रैली और बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

समाज की दलील
संयुक्त ईसाई समाज की ओर से कहा गया कि हम रायपुर और छत्तीसगढ़ के निवासी हैं। हमारे साथ शहर के सभी पादरी फेलोशिप, लीडर संगठन और विभिन्न ईसाई संस्थाएं जुड़ी हुई हैं। हम वर्षों से घरेलू प्रार्थना सभाएँ आयोजित करते आ रहे हैं। ईसाई धर्म में शांतिपूर्वक एक स्थान पर एकत्र होकर प्रार्थना और आराधना करना परंपरा का हिस्सा है।
धार्मिक आधार का हवाला
ईसाई समाज ने अपने ज्ञापन में पवित्र बाइबिल का उल्लेख करते हुए कहा कि घरों में प्रार्थना सभा करने की परंपरा धर्मग्रंथ में स्पष्ट रूप से लिखी गई है। प्रेरितों के काम 2:46 में उल्लेख है कि लोग प्रतिदिन मंदिर में एकत्र होते थे और घर-घर प्रार्थना करते थे। इसी तरह रोमियों 16:5, 1 कुरिन्थियों 16:19, कुलुस्सियों 4:15, फिलेमोन 1:2 में भी घरेलू प्रार्थना सभा का वर्णन मिलता है।
प्रशासन के सामने चुनौती
संयुक्त ईसाई समाज की मांगों के बाद जिला प्रशासन पर अब यह दबाव है कि वह इस मामले में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए।
























