वीरेंद्र तोमर के समर्थन में राजपूत करणी सेना का धरना

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रायपुर । जिले में हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र सिंह तोमर के समर्थन में राजपूत करणी सेना ने जोरदार प्रदर्शन किया और 8 मांगों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी परिसर में हुई। इसके बाद ASP लखन पटले और ADM यूएस बांदे के साथ चार-पांच थानों के थाना प्रमुखों की मौजूदगी में लगभग एक घंटे की हाई लेवल बैठक हुई। बैठक के बाद करणी सेना ने धरना प्रदर्शन समाप्त किया। कार्यक्रम में करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत ने कहा कि प्रशासन ने उनकी मांगों पर 15 दिन का समय मांगा था, लेकिन करणी सेना ने प्रशासन को 30 दिन का समय देने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन ने तोमर परिवार को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो भविष्य में गृह मंत्री के बंगले का घेराव किया जाएगा।

इस अवसर पर हरियाणा के ओकेंद्र सिंह राणा ने चेतावनी दी कि जहां-जहां भाजपा की सरकार है, वहां-वहां वे वोट की चोट देंगे। उन्होंने कहा, “हमें छेड़ा तो छोड़ेंगे नहीं। हमारी माताओं और बहनों पर बात आई तो छोड़ेंगे नहीं। कमल का फूल, हमारी भूल नहीं। जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं।” ADM यूएस बांदे ने बताया कि करणी सेना ने 8 बिंदुओं में अपनी मांगें रखी हैं। प्रशासन ने उन्हें इस पर विचार करने के लिए 15 दिन का समय दिया है। ज्ञापन को उच्च अधिकारियों तक भेजा जाएगा और जो भी अपडेट आएगा, उसे करणी सेना को सूचित किया जाएगा। दरअसल, रायपुर पुलिस ने वीरेंद्र सिंह तोमर को सूदखोरी, जबरन वसूली और अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के बाद करणी सेना ने महापंचायत आयोजित की और 8 मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।

इनमें मुख्य मांगें TI और CSP के खिलाफ कार्रवाई करने, तोमर परिवार को न्याय दिलाने और करणी सेना पदाधिकारियों पर राजनीतिक रूप से प्रेरित मामलों को निरस्त कराने की शामिल थीं। महापंचायत के दौरान राज शेखावत, वीरेंद्र सिंह तोमर की पत्नी और 10 अन्य लोगों के साथ इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी पहुंचे। उन्होंने गृहमंत्री विजय शर्मा से व्यक्तिगत मुलाकात की मांग की, लेकिन मुलाकात नहीं होने पर परिसर में ही धरना शुरू कर दिया। शेखावत ने कहा कि वे तोमर परिवार के साथ अन्न-जल त्याग कर बैठे हैं। कुछ समय बाद प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और मांगों पर विचार करने के लिए 15 दिन की मोहलत मांगी। इसके बाद करणी सेना ने धरना समाप्त करने का ऐलान किया।

राज शेखावत ने आरोप लगाया कि तोमर को गिरफ्तारी के बाद सार्वजनिक रूप से जुलूस निकालकर नंगे पैर घुमाया गया, हथकड़ी लगाकर मीडिया कवरेज कराया गया और उनकी पत्नी, माता, बेटी सहित परिवार की महिला सदस्यों के साथ बदसलूकी की गई। उन्होंने कहा कि पुलिस ने नियमों का पालन नहीं किया और वीरेंद्र सिंह तोमर को मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी गई। उन्होंने SSP लाल उम्मेद सिंह पर भी आरोप लगाया कि वे इस मामले में सक्रिय रूप से शामिल थे और प्रशासनिक लापरवाही के चलते तोमर को उचित कस्टोडियल एक्सेस नहीं मिला। शेखावत ने मांग की कि SSP लाल उम्मेद सिंह को तत्काल पदमुक्त किया जाए और करणी सेना पदाधिकारियों पर लगाए गए आधारहीन और राजनीतिक रूप से प्रेरित झूठे प्रकरणों को निरस्त किया जाए।

राज शेखावत ने चेतावनी दी कि अगर उनकी 8 मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे और रायपुर की सड़कों पर प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल तोमर परिवार के समर्थन में नहीं है, बल्कि न्याय और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी है। इस प्रदर्शन में प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद करणी सेना ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शन ने शहर में सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर चर्चा को फिर से प्रमुखता दी और प्रशासन पर यह दबाव बनाया कि वे हिस्ट्रीशीटरों के मामलों में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करें। इस तरह का प्रदर्शन रायपुर में ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि इसमें न केवल परिवारिक न्याय की मांग की गई, बल्कि पुलिस और प्रशासनिक संस्थाओं के खिलाफ सीधे तौर पर सवाल उठाए गए। करणी सेना ने इसे राज्य स्तर पर चेतावनी स्वरूप देखा है और भविष्य में आवश्यक कार्रवाई करने की धमकी भी दी है।

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