नई दिल्ली । भारत की रक्षा शक्ति को एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने शुक्रवार को यूएवी लॉन्च्ड प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल (ULPGM)-वी3 का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित नेशनल ओपन एरिया रेंज (NOAR) में किया गया।


इस खास मौके की जानकारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर साझा करते हुए इस उपलब्धि के लिए डीआरडीओ, एमएसएमई, स्टार्ट-अप्स और इंडस्ट्री पार्टनर्स को बधाई दी।
क्या बोले रक्षा मंत्री?
राजनाथ सिंह ने अपने X अकॉउंट में लिखा: “भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और अहम कदम! DRDO ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित NOAR में ULPGM-V3 का सफल परीक्षण किया है। स्वदेशी रक्षा तकनीक को विकसित करने और उसे आत्मनिर्भर भारत का आधार बनाने के लिए सभी को बधाई।”
क्या है यूएलपीजीएम वी3?
यूएलपीजीएम-वी3 एक ड्रोन से लॉन्च की जाने वाली प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल है, जिसे आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है।
इस मिसाइल में कई अत्याधुनिक फीचर्स शामिल हैं:
फायर-एंड-फॉरगेट क्षमता
इमेजिंग इन्फ्रारेड सीकर और पैसिव होमिंग टेक्नोलॉजी, जिससे यह दिन और रात दोनों समय सटीक हमला कर सकती है
12.5 किलो वजनी मिसाइल, जो दिन में 4 किलोमीटर और रात में 2.5 किलोमीटर तक सटीक निशाना साध सकती है
ड्यूल थ्रस्ट सॉलिड प्रोपल्शन यूनिट द्वारा संचालित
पहले के वर्जन वी1 और वी2 से ज्यादा उन्नत
किन कंपनियों की भागीदारी?
अदाणी ग्रुप और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) इस परियोजना के प्रमुख उद्योग साझेदार हैं
डीआरडीओ ने मिसाइल की डिजाइन, डेवलपमेंट और परीक्षण की जिम्मेदारी संभाली है
पहले भी हो चुके हैं परीक्षण
इससे पहले मई 2025 में भारतीय सेना ने पोखरण, बबीना और जोशीमठ फील्ड फायरिंग रेंज में इस हथियार प्रणाली का परीक्षण किया था। युद्ध जैसी परिस्थितियों में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिमुलेशन के जरिए इन परीक्षणों को अंजाम दिया गया था।
यह परीक्षण न केवल भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को दिखाता है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि भारतीय उद्योग अब आधुनिक और जटिल रक्षा तकनीकों को विकसित करने में पूरी तरह सक्षम है।
