मुंबई । ‘धुरंधर: द रिवेंज’ हर मायने में रणवीर सिंह की फिल्म बनकर सामने आई है, जहां उनकी दमदार परफॉर्मेंस पूरी कहानी पर हावी नजर आती है। पहले फ्रेम से लेकर क्लाइमैक्स तक फिल्म उनकी मौजूदगी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिससे यह साफ हो जाता है कि यह सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि एक जबरदस्त सिनेमैटिक प्रस्तुति है।
फिल्म में रणवीर ने अपने किरदार को गहराई और नियंत्रण के साथ निभाया है। कहीं वह भावुक कर देते हैं तो कहीं उनका गुस्सा दर्शकों को झकझोर देता है। इस बार उनके अभिनय में दिखावा कम और परफॉर्मेंस की गहराई ज्यादा नजर आती है, जो इसे और प्रभावशाली बनाती है।
रणवीर का किरदार कई परतों से भरा हुआ है, जिसमें उन्होंने इंटेंसिटी और संतुलन को बेहद सहज तरीके से पेश किया है। कई दृश्यों में बिना ज्यादा संवाद के ही वह भावनाएं व्यक्त कर देते हैं, वहीं कुछ सीन में उनका उग्र रूप दर्शकों को बांधे रखता है। यही विविधता फिल्म को एक साधारण सीक्वल से आगे ले जाकर एक मजबूत प्रस्तुति बनाती है।
उनकी अदाकारी इतनी प्रभावशाली है कि वह किरदार में पूरी तरह डूब जाते हैं, जिससे अभिनेता और चरित्र के बीच की दूरी मिटती नजर आती है। उनकी बॉडी लैंग्वेज, आवाज का उतार-चढ़ाव और इमोशनल ग्राफ मिलकर एक ऐसा अनुभव तैयार करते हैं जो भव्य होने के साथ-साथ बेहद व्यक्तिगत भी लगता है।
इस परफॉर्मेंस को एक तरह की मास्टरक्लास कहना गलत नहीं होगा। फिल्म में भले ही एक्शन और भव्यता भरपूर हो, लेकिन इसकी असली ताकत रणवीर सिंह का अभिनय ही है, जो दर्शकों के मन में लंबे समय तक छाप छोड़ने वाला है।























