लघु वेतन शासकीय चतुर्थ वर्ग कर्मचारी संघ की एक माह में तीन बड़ी जीत
डोंगरगढ़ | छत्तीसगढ़ लघु वेतन शासकीय चतुर्थ वर्ग कर्मचारी संघ ने एक महीने के भीतर तीन महत्वपूर्ण मामलों में असरदार पहल की है। संघ के दबाव के बाद शासन स्तर पर रतन कश्यप प्रकरण की गलत व्याख्या सुधारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यही नहीं, रेशम विभाग में हजारों कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मजदूरी लागू हुई और दिल्ली में केंद्रीय मंत्रालय तक पहुंच कर एकलव्य संस्थानों के कर्मचारियों के हितों पर निर्णायक चर्चा हुई।
रतन कश्यप प्रकरण: उच्च न्यायालय आदेश की गलत व्याख्या सुधरने की दिशा में कार्रवाई
आदिवासी विकास विभाग द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश की गलत व्याख्या के कारण सैकड़ों कर्मचारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोक दी गई थी। इस मुद्दे पर संघ के प्रतिनिधि मंडल ने मंत्रालय में विभागीय प्रमुख सचिव सुषमा सावंत और आदिवासी विकास विभाग के सचिव से मिलकर ज्ञापन सौंपा।
शासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि यदि कहीं भी आदेश की गलत व्याख्या हुई है तो उसे तुरंत सुधारा जाएगा और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
संघ ने कर्मचारियों को सतर्क किया है कि वे किसी भी प्रकार के विचौलियों के संपर्क में न आएं। संगठन का दावा है कि यह वही संघ है जिसने 2008 में हजारों कर्मचारियों का नियमितीकरण कराया था और आज भी केवल न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। संघ को जानकारी मिली है कि कुछ लोग फिर से हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की बात फैला रहे हैं।
संघ की स्पष्ट सलाह है कि वर्तमान में कोई भी याचिका दायर करना उचित नहीं है क्योंकि शासन स्तर पर मामला निर्णायक मोड़ पर है। संघ का कहना है कि यदि आवश्यकता हुई तो न्यायालय का दरवाजा हमेशा खुला है।
रेशम विभाग में न्यूनतम मजदूरी लागू: कर्मचारियों के हित में त्वरित आदेश
13 अक्टूबर को संघ के प्रतिनिधि मंडल ने रेशम विभाग में न्यूनतम मजदूरी लागू करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा था। संचालक अनुपस्थित थे, लेकिन अपर संचालक ने ज्ञापन स्वीकार किया। संघ के तर्क और दबाव के बाद विभाग ने तत्काल आदेश जारी किया, जिससे हजारों रेशम कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी का मार्ग मिला। इसे संघ अपनी बड़ी जीत मान रहा है।
दिल्ली में महत्वपूर्ण पहल: एकलव्य संस्थानों के कर्मचारियों पर केंद्रीय स्तर पर चर्चा
संघ प्रतिनिधि मंडल ने दिल्ली के निर्माण भवन में केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके के निर्देश पर उनके सचिव देवानंद उईके से विस्तृत चर्चा की।
संघ ने कई मांगें रखीं, जिनमें शामिल हैं:
केंद्र के समान न्यूनतम मजदूरी, श्रम सम्मान राशि, साप्ताहिक अवकाश, एपीएफ कटौती, रिक्त पदों का नियमितीकरण और नीति सुधार।
देवानंद उईके ने स्पष्ट कहा कि कर्मचारियों के हित में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जाएगी।
यह पहल प्रदेश अध्यक्ष बिंदेश्वर रामदेव के निर्देश पर प्रांतीय महामंत्री योगेश चौरे की अगुवाई में हुई।
संघ की एक माह की तीन उपलब्धियाँ
रतन कश्यप प्रकरण में गलत व्याख्या सुधारने की कार्रवाई शुरू
रेशम विभाग में न्यूनतम मजदूरी लागू
दिल्ली में केंद्रीय मंत्रालय को एकलव्य कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए बाध्य करना
अंत में संघ ने कहा कि यह केवल ज्ञापन नहीं बल्कि कर्मचारियों की सामूहिक आवाज है, जिसने छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों की जीत तय की है।























