
RIP Asha Bhosle:संगीत जगत की एक और मशाल बुझी, अलविदा आशा भोंसले ‘क्वीन ऑफ मेलोडी’
भारतीय पार्श्व संगीत की दिग्गज गायिका आशा भोंसले का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। रविवार, 12 अप्रैल 2024 की रिपोर्टों के अनुसार, मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में संक्षिप्त बीमारी के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके निधन से जुड़ी मुख्य जानकारी:
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निधन का कारण: अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, उनका निधन ‘मल्टी-ऑर्गन फेलियर’ (कई अंगों के काम बंद कर देने) के कारण हुआ। उन्हें शनिवार शाम को अत्यधिक थकान और सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था।
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अंतिम समय: उनकी मृत्यु के समय उनके बेटे आनंद और पोती ज़नाई भोंसले उनके साथ थे। रविवार दोपहर को डॉक्टर प्रतीत समदानी की देखरेख में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा।
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अंतिम संस्कार: महाराष्ट्र सरकार ने उनका अंतिम संस्कार पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ करने का निर्णय लिया है। प्रशंसकों के अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को सोमवार को उनके आवास पर रखा जाएगा।
उनकी महान विरासत पर एक नजर:
आशा भोंसले केवल एक गायिका नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की एक पहचान थीं। उनके आठ दशक लंबे करियर की कुछ खास बातें:
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बहुमुखी प्रतिभा: अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर की छाया से निकलकर आशा जी ने अपनी एक अलग पहचान बनाई। वे शास्त्रीय संगीत, गजल और भजन से लेकर चुलबुले और ‘कैबरे’ गानों तक, हर शैली में माहिर थीं।
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विश्व रिकॉर्ड: साल 2011 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें संगीत के इतिहास में सबसे अधिक रिकॉर्ड की जाने वाली कलाकार के रूप में मान्यता दी। उन्होंने 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए।
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प्रमुख सम्मान: कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मानों में से एक पद्म विभूषण और फिल्म जगत के सबसे बड़े पुरस्कार दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया था।
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आर.डी. बर्मन के साथ जोड़ी: संगीतकार आर.डी. बर्मन (पंचम दा) के साथ उनकी जोड़ी ने बॉलीवुड को कई सदाबहार गाने दिए। उन्होंने मधुबाला से लेकर उर्मिला मातोंडकर जैसी कई पीढ़ियों की अभिनेत्रियों को अपनी आवाज दी।
श्रद्धांजलि और सम्मान:
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पीएम मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित कई बड़ी हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
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आशा जी को उनके अद्भुत करियर के लिए दादा साहब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया था।
यह भारतीय संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी जादुई आवाज और ‘खनक’ हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेगी।
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