रजत महोत्सव में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का स्टॉल बना आकर्षण का केंद्र

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स्व-सहायता समूह की महिलाओं के हाथों से बनी ग्रामीण उत्पादों को मिल रही सराहना

अम्बिकापुर । छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित राज्योत्सव कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) द्वारा लगाए गए स्टॉल ने आगंतुकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इस स्टॉल में जिले के विभिन्न क्लस्टरों से जुड़ी स्व-सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं द्वारा निर्मित ग्रामीण उत्पादों का प्रदर्शन एवं बिक्री की जा रही है।

स्टॉल में कच्ची घानी सरसों तेल, बांस से निर्मित सुपा पापड़, हल्दी-मिर्च पाउडर, मल्टीग्रेन आटा, सरपबती गेहूं का आटा, रागी का आटा, बेसन, मक्का का आटा जैसे शुद्ध एवं स्थानीय उत्पाद रखे गए हैं। सभी उत्पाद महिलाओं द्वारा स्वयं तैयार किए गए हैं, जो न केवल गुणवत्ता में बेहतर हैं बल्कि स्थानीय संसाधनों के उपयोग और स्वदेशी उत्पादन को भी प्रोत्साहन दे रहे हैं।

स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि यह उत्पाद क्लस्टर स्तर पर निर्मित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि स्टॉल पर आने वाले आगंतुकों की अच्छी खासी भीड़ है, और अब तक 21 हजार रुपए से अधिक की बिक्री हो चुकी है। आगंतुक इन उत्पादों की गुणवत्ता और पैकेजिंग की सराहना करते हुए इनके निर्माण की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं।

महिलाओं ने शासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बिहान योजना के माध्यम से उन्हें स्वरोजगार का अवसर मिला है। पहले जहां वे घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, वहीं अब अपने उत्पादों के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। समूह की सदस्य श्रीमती ममता ने बताया, “बिहान योजना से हमें प्रशिक्षण और बाजार दोनों मिले हैं। आज हमारे उत्पाद राज्योत्सव जैसे बड़े मंच पर लोगों तक पहुंच रहे हैं, यह हमारे लिए गर्व की बात है।

स्टॉल का अवलोकन करने पहुंचे दर्शकों ने भी महिलाओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी बन चुके हैं। ऐसे आयोजन महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और अपने उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का यह स्टॉल न केवल महिलाओं की मेहनत और स्वावलंबन की कहानी कहता है, बल्कि “नवा छत्तीसगढ़” के उस सपने को भी साकार करता है, जिसमें हर महिला आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बने।

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