गुरु घासीदास जयंती पर्व विशेष रचना: बाबा घासीदास-उर्मिला देवी ‘उर्मि’

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बाबा घासीदास


जय‌ गुरु बाबा घासीदास।
दुखिया मन के रहिस खास।।

जम्मो जन बर दिए संदेस।
मनखे मनखे हवय बिसेस।।

सत्य नाम के डंका बजाए।
झूठ कपट ले बचना सिखाए।।

जात पात के भेद मिटाए।
एक बरोबर सब समझाए।।

सत्य अहिंसा पर उपकार।
जिनगी सुधारे बने बिचार।।

झन कर भैया गरब गुमान।
मनखे मनखे एक समान ।।

दाई अमरौतिन के ललना।
महंगु ददा झुलाए पलना।।

धाम गिरोदपुरी कहलाए।
जिहां गुरु जी ध्यान लगाए।

जैतखाम के कद है ऊंचा।
सत्यनाम कहै सबसे सांचा।।

तोर संदेसा करै अंजोर।।
जय गुरु बाबा ,जय हो तोर।


मौलिक रचना
लेखिका
उर्मिला देवी ‘उर्मि’
मंच संचालिका
रायपुर छत्तीसगढ़

 

 

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