नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित भोजनालयों और होटलों पर क्यूआर कोड लगाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि सभी होटलों को अपने वैध लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और अन्य आवश्यक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने होंगे।


मंगलवार को जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि कांवड़ यात्रा का आज अंतिम दिन है और इसलिए क्यूआर कोड, मालिक का नाम या अन्य पहचान संबंधी निर्देशों पर विस्तृत चर्चा नहीं की गई।
याचिका में उठाया गया निजता का मुद्दा
यह सुनवाई शिक्षाविद अपूर्वानंद झा और अन्य द्वारा दायर याचिका पर हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार की 25 जून की प्रेस विज्ञप्ति को चुनौती दी गई थी। उसमें कांवड़ मार्ग पर स्थित सभी खाने की दुकानों पर क्यूआर कोड अनिवार्य करने की बात कही गई थी, जिससे मालिकों की पहचान और प्रोफाइलिंग संभव हो सके।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह कदम निजता के अधिकार और भेदभाव रहित व्यावसायिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। याचिका में इसे धार्मिक और जातिगत पहचान के आधार पर प्रोफाइलिंग की कोशिश बताया गया।
सुप्रीम कोर्ट का सीमित हस्तक्षेप
अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वो केवल यह आदेश दे रही है कि होटल और ढाबे संचालक अपने वैधानिक दस्तावेजों को अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें, जो कि मौजूदा कानूनों के तहत अपेक्षित हैं।
पृष्ठभूमि में पहले दिए गए आदेश
गौरतलब है कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश सरकारों के ऐसे ही एक निर्देश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी, जिसमें कांवड़ मार्ग पर ढाबों और दुकानों के मालिकों और कर्मचारियों के नाम उजागर करने को कहा गया था।
कांवड़ यात्रा मार्ग पर नियमों के पालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्टता तो दी है, लेकिन क्यूआर कोड को लेकर कोई सीधी रोक नहीं लगाई है। यह मामला आगे भी सुनवाई के लिए खुला रहेगा, खासकर निजता और प्रोफाइलिंग जैसे संवेदनशील पहलुओं को लेकर।
