बजट की कमी का हवाला, सोशल मीडिया पर जताई नाराज़गी


रायगढ़। ऐतिहासिक चक्रधर समारोह 2025 में होने वाली छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय गायक, संगीतकार और अभिनेता नितिन दुबे की प्रस्तुति अंतिम समय पर रद्द कर दी गई। आयोजन समिति ने इसके पीछे बजट की कमी का तर्क दिया। यह कार्यक्रम 1 सितंबर को तय था और इसे लेकर शहर में जबरदस्त उत्साह था। मीडिया रिपोर्ट्स, पोस्टर और बैनरों में उनके शो को मुख्य आकर्षण बताया गया था। अचानक हुए इस फैसले से न केवल दर्शकों बल्कि स्वयं कलाकार ने भी निराशा और नाराज़गी जताई है।
सोशल मीडिया पर उठाए सवाल
नितिन दुबे ने इंस्टाग्राम और फेसबुक पर वीडियो जारी कर कहा कि जब कार्यक्रम पहले से तय था और भुगतान भी फाइनल कर लिया गया था, तो अचानक मेल कर बजट की समस्या बताना अनुचित है। उन्होंने कहा, “हमसे कहा गया कि पूरी राशि उपलब्ध नहीं है और आधे भुगतान पर शो करना होगा। कलाकारों को अंतिम समय पर इस तरह की शर्तें थोपना उनका अपमान है। जब बॉलीवुड कलाकारों को पूरा भुगतान किया जा सकता है तो छत्तीसगढ़ी कलाकारों के लिए हमेशा बजट क्यों कम पड़ जाता है?”
दर्शकों में निराशा
दर्शकों का मानना है कि नितिन दुबे की प्रस्तुति समारोह की सबसे बड़ी आकर्षणों में से एक थी। उनकी अनुपस्थिति से चक्रधर समारोह की चमक फीकी पड़ गई है। पिछले 25 वर्षों से छत्तीसगढ़ी संगीत जगत में सक्रिय दुबे ने 2,500 से अधिक लाइव प्रस्तुतियाँ दी हैं और उन्हें प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ लाइव परफॉर्मर माना जाता है।
रायगढ़ को दी पहचान
नितिन दुबे का सुपरहिट गीत ‘रायगढ़ वाला राजा’ पूरे देश में रायगढ़ की पहचान बन चुका है। इस गीत के दो आधिकारिक वीडियो मिलाकर 75 करोड़ से अधिक व्यूज़ हो चुके हैं। यही कारण था कि रायगढ़वासियों को उनके शो का खास इंतजार था। दर्शकों का कहना है कि जिस कलाकार ने रायगढ़ का नाम देश-दुनिया में रोशन किया, उसे अपने ही शहर के मंच से वंचित करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
सम्मानित कलाकार
नितिन दुबे को छत्तीसगढ़ के संगीत को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाने के लिए “छत्तीसगढ़ रत्न” सम्मान प्रदान किया गया है। ‘रायगढ़ वाला राजा’ के अलावा उन्होंने ‘चंदा रे’, ‘का तैं रूप निखारे चंदैनी’, ‘नीलपरी’, ‘गुलमोहर’ और कई सुपरहिट गीत दिए हैं। साथ ही जसगीत और पंथी गीतों के जरिए भी प्रदेश की संस्कृति को समृद्ध किया है।
समारोह पर असर
नितिन दुबे का कार्यक्रम रद्द होने से चक्रधर समारोह को लेकर बनी उत्सुकता प्रभावित हुई है। संगीत प्रेमियों का कहना है कि समारोह में स्थानीय कलाकारों को उचित स्थान और सम्मान देना जरूरी है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर भी आयोजन समिति से नाराज़गी जताई।
