नोआ वेबस्टर – अमेरिकी शब्दों का निर्माता

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नोआ वेबस्टर – अमेरिकी शब्दों का निर्माता

प्रस्तावना
जब भी हम अंग्रेजी के शब्दकोश की बात करते हैं, तो एक नाम अनायास ही सामने आता है – नोआ वेबस्टर। वे केवल एक लेखक नहीं थे, बल्कि अमेरिकी संस्कृति और भाषा के निर्माता थे। उन्होंने अमेरिकी अंग्रेजी को एक राष्ट्रीय पहचान देने का कार्य किया। यह लेख नोआ वेबस्टर के जीवन, विचारों, संघर्षों और शब्दों के संसार में उनके अद्वितीय योगदान की शब्दीय जीवंत प्रस्तुति है।

1. प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
नोआ वेबस्टर का जन्म 16 अक्टूबर 1758 को वेस्ट हार्टफोर्ड, कनेक्टिकट में हुआ था। वे एक शिक्षित कृषक परिवार से थे। उन्होंने येल यूनिवर्सिटी से स्नातक किया और शुरू में कानून की पढ़ाई शुरू की लेकिन जल्द ही शिक्षा और भाषा में रुचि विकसित हुई।

2. शिक्षा में सुधार की दृष्टि
अमेरिका में क्रांति के बाद, वेबस्टर ने महसूस किया कि देश को एक संयुक्त भाषा और शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है। उन्होंने “The American Spelling Book” लिखा, जिसे लाखों बच्चों ने पढ़ा।

3. अमेरिकी अंग्रेज़ी का जन्मदाता
वेबस्टर ने ब्रिटिश अंग्रेज़ी से हटकर एक विशेष अमेरिकी शैली के अंग्रेज़ी शब्दकोश की रचना की। 1828 में प्रकाशित “An American Dictionary of the English Language” ने अमेरिकी शब्दों, उच्चारण और व्याकरण को एक नई पहचान दी।

4. राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण
वेबस्टर एक फेडरलिस्ट थे और अमेरिकी संविधान के समर्थक भी। उन्होंने कई राजनीतिक लेख लिखे और भाषा के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने की कोशिश की।

5. नैतिकता और धर्म पर विचार
उनके शब्दकोश में न केवल शब्दों के अर्थ, बल्कि नैतिक और धार्मिक उदाहरण भी सम्मिलित थे। वे मानते थे कि भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का भी औजार है।

6. आलोचना और अस्वीकार्यता का सामना
शुरुआत में उनके शब्दकोश को ब्रिटिश प्रभाव वाले अमेरिकियों ने अस्वीकार किया, लेकिन समय के साथ यह मान्यता प्राप्त करता गया। उनका जीवन इस बात का प्रतीक है कि सच्चा बदलाव समय लेता है।

7. अंतिम वर्ष और विरासत
वेबस्टर का निधन 28 मई 1843 को हुआ। आज, Merriam-Webster शब्दकोश उनके नाम की अमिट छाप है। अमेरिकी अंग्रेजी को जो स्वरूप मिला है, उसका श्रेय वेबस्टर को ही जाता है।

निष्कर्ष
नोआ वेबस्टर ने शब्दों के माध्यम से एक राष्ट्र को आकार दिया। उनका योगदान केवल भाषा तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण में भी था। वे उन विरले व्यक्तियों में थे, जिन्होंने कलम से क्रांति की।

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