बंगाल चुनाव से पहले ममता सरकार का दांव, 5 नए सांस्कृतिक और विकास बोर्ड की घोषणा

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पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी का मास्टरस्ट्रोक, 5 नए विकास बोर्ड बनाने का ऐलान

 

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के वंचित और हाशिए पर रह रहे समुदायों के लिए पाँच नए सांस्कृतिक एवं विकास बोर्ड गठित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इन बोर्डों के माध्यम से संबंधित समुदायों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ उनके सामाजिक और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि राज्य सरकार जल्द ही मुंडा (अनुसूचित जनजाति), कोरा (अनुसूचित जनजाति), डोम (अनुसूचित जनजाति), कुंभकार (अन्य पिछड़ा वर्ग) और सदगोपे (अन्य पिछड़ा वर्ग) समुदायों के लिए अलग-अलग बोर्ड स्थापित करेगी। उन्होंने इन समुदायों को बंगाल की समृद्ध और जीवंत सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा बताते हुए सभी को बधाई भी दी।

ममता बनर्जी ने कहा कि इन बोर्डों का उद्देश्य इन समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करना और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उनके अनुसार, इन पहल के जरिए इन समुदायों की विशिष्ट भाषाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखा जाएगा, साथ ही उनके सामाजिक-आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2013 से राज्य सरकार विभिन्न कमजोर और पिछड़े समुदायों के लिए कई विकास बोर्ड गठित कर चुकी है, जिनका उद्देश्य उनके सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि “मां, माटी और मानुष के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का मतलब है कि हम यह सुनिश्चित करें कि कोई भी समुदाय पीछे न छूटे। हमारा लक्ष्य समावेशी विकास के माध्यम से हर चेहरे पर मुस्कान लाना है।”

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घोषणा 2026 में प्रस्तावित पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले आई है, जब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 77 सीटें जीतकर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी और आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की तैयारी कर रही है।

यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की पश्चिम बंगाल यात्रा को लेकर राजनीतिक विवाद भी चर्चा में रहा। 7 मार्च को आयोजित एक संथाल सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर असंतोष व्यक्त किया था। उन्होंने कहा था कि आयोजन स्थल दूर होने के कारण कई संथाल समुदाय के लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। साथ ही उन्होंने कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और अन्य राज्य मंत्रियों की अनुपस्थिति का भी उल्लेख किया था।

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