
मुंबई। भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत में विपक्ष और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए इसे देश का आंतरिक राजनीतिक मामला बताया। अमेरिकी मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों पर व्यंग्य किया और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का उल्लेख किया।
फॉक्स न्यूज की बुधवार को प्रसारित रिपोर्ट के अनुसार, भारत में विरोध प्रदर्शनों और उन्हें लेकर संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की आलोचना से जुड़े सवाल पर रुबियो ने कहा कि यूएन विशेषज्ञों पर उनकी अपनी राय है। उन्होंने हंसते हुए कहा, “यूएन एक्सपर्ट्स… मेरे फेवरेट हैं।” इसके बाद उन्होंने टिप्पणी की कि यूएन विशेषज्ञ अपने आप में ही एक विरोधाभास हैं।
रुबियो ने कहा कि भारत में विरोध प्रदर्शन वहां का घरेलू राजनीतिक विषय है और अमेरिका इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र है और चुनाव होते हैं। ऐसे में वहां के राजनीतिक मामलों पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में भी हर दिन विरोध प्रदर्शन होते हैं।
विरोध प्रदर्शन और दंगों के बीच अंतर बताते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि लोगों का सड़कों पर उतरकर अपनी बात रखना राजनीतिक बहस और मतभेदों का संकेत हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी उन घटनाओं के संदर्भ में नहीं थी, जिनमें तोड़फोड़, इमारतों में घुसने या आगजनी जैसी हिंसक गतिविधियां शामिल होती हैं।
रुबियो ने इस दौरान क्यूबा का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि वहां विपक्ष के लिए खुलकर अपनी बात रखना मुश्किल है और ऐसा करने वालों को जेल, दमन या निर्वासन का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने दोहराया कि भारत के घरेलू राजनीतिक मामलों पर फैसला वहां के लोगों को ही करना है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मंगलवार को अपनी पत्नी जेनेट के साथ मुंबई पहुंचे थे। निर्धारित कार्यक्रम के तहत उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच रक्षा सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं और इसके जल्द पूरा होने की उम्मीद है।


















