
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में जायज नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने जोर दिया कि आतंकवाद से निपटने के लिए दोहरे मानदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए। आतंकियों को आर्थिक मदद देने वालों, उन्हें समर्थन देने वालों और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई जरूरी है।
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार की मौजूदगी में राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल हमले करने वालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके वित्तपोषण, कट्टरपंथ, आतंकियों की भर्ती और उन्हें सुरक्षित पनाह देने वाले पूरे नेटवर्क को निशाना बनाना जरूरी है।
आतंकवाद विकास और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती
रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवाद का नुकसान केवल लोगों की जान जाने तक सीमित नहीं है। यह निवेश और व्यापार को प्रभावित करता है, समाज में कट्टरपंथ को बढ़ावा देता है और युवाओं को विकास के अवसरों से दूर करता है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट होकर कार्रवाई करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
भारत की आर्थिक और तकनीकी प्रगति का किया उल्लेख
दुशांबे में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने भारत की आर्थिक, तकनीकी और सामरिक प्रगति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत समृद्धि, ज्ञान और शक्ति के साथ वैश्विक शांति तथा मानव कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता मजबूत कर रहा है। उन्होंने इसे ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से जोड़ते हुए कहा कि भारत का दृष्टिकोण सहयोग और साझा विकास पर आधारित है।
राजनाथ सिंह के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक वृद्धि में भारत का योगदान 16 प्रतिशत से अधिक है और देश लगभग 7.8 प्रतिशत की विकास दर से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों से भारतीय उत्पादकों और विनिर्माताओं को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है। उन्होंने देश के विदेशी मुद्रा भंडार के 700 अरब डॉलर के पार पहुंचने का भी उल्लेख किया।
रक्षा उत्पादन और अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती क्षमता
रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में हुई प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि देश का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये और रक्षा उत्पादन 1.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि भारत में स्टार्टअप की संख्या ढाई लाख से अधिक हो चुकी है।
इसके अलावा, उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि, सेमीकंडक्टर निर्माण में प्रगति और यूपीआई के माध्यम से डिजिटल लेनदेन के विस्तार को भी देश में हो रहे बदलावों का उदाहरण बताया। अंतरिक्ष क्षेत्र में चंद्रयान और आदित्य-एल1 मिशन की उपलब्धियों तथा गगनयान की तैयारियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में अपनी क्षमता लगातार बढ़ा रहा है।
भारत-ताजिकिस्तान के सांस्कृतिक संबंधों पर भी दिया जोर
राजनाथ सिंह ने विदेशों में रह रहे भारतीयों को देश की संस्कृति, मूल्यों और परंपराओं का प्रतिनिधि बताया। उन्होंने भारत और ताजिकिस्तान के बीच संगीत, साहित्य और सिनेमा के माध्यम से विकसित सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीय दोनों देशों की मित्रता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
रक्षा मंत्री के संबोधन में आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक सहयोग प्रमुख विषय रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद से मुकाबले के लिए उसके पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई जरूरी है, जबकि भारत आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए वैश्विक शांति तथा मानव कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी बनाए रखना चाहता है।















