
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद ने एक बार फिर कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मामले में शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने इलाहाबाद जिला न्यायालय का दरवाजा दोबारा खटखटाते हुए शंकराचार्य की प्रस्तावित ‘गौ प्रतिष्ठा यात्रा’ पर रोक लगाने और उनके विदेश जाने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इस याचिका पर अदालत में 13 मार्च को सुनवाई तय की गई है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत में दाखिल अपनी याचिका में दावा किया है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ पहले से दर्ज मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि जब तक यह मामला पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक शंकराचार्य की सार्वजनिक यात्राओं और सभाओं पर रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से ‘गौ प्रतिष्ठा यात्रा’ का जिक्र करते हुए कहा कि इससे माहौल प्रभावित हो सकता है, इसलिए इसे फिलहाल रोकना जरूरी है दरअसल, यह पूरा विवाद उस घटना से जुड़ा है जो कथित तौर पर रीवा एक्सप्रेस ट्रेन में हुई थी। आशुतोष ब्रह्मचारी का आरोप है कि ट्रेन यात्रा के दौरान शंकराचार्य के कुछ शिष्यों और समर्थकों ने उन पर हमला किया था, जिसमें वह घायल हो गए थे। इसी घटना के आधार पर उन्होंने पहले भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी और अब उसी मामले को लेकर अदालत में नई याचिका दायर की है।

सोमवार को आशुतोष ब्रह्मचारी इलाहाबाद जिला न्यायालय पहुंचे, जहां उन्होंने मीडिया से बातचीत में अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उन्होंने कहा कि उन्हें आशंका है कि मुकदमे की प्रक्रिया से बचने के लिए शंकराचार्य विदेश जा सकते हैं। इसलिए उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि एहतियात के तौर पर उनका पासपोर्ट और वीजा जब्त किया जाए, ताकि वे देश छोड़कर बाहर न जा सकें। आशुतोष ब्रह्मचारी का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल न्याय पाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रेन में हुई घटना के बाद उन्हें गंभीर चोटें आईं और इस मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक शंकराचार्य की यात्राओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक लगाना उचित होगा।
दूसरी ओर, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थक इन आरोपों को निराधार बता रहे हैं। उनका कहना है कि धार्मिक यात्राओं और कार्यक्रमों को विवाद में घसीटना उचित नहीं है। समर्थकों के अनुसार, ‘गौ प्रतिष्ठा यात्रा’ का उद्देश्य समाज में गौ संरक्षण और धार्मिक जागरूकता को बढ़ावा देना है, और इसे रोकने की मांग पूरी तरह अनुचित है। गौ प्रतिष्ठा यात्रा’ को लेकर पहले से ही कई स्थानों पर तैयारियां चल रही हैं। इस यात्रा का उद्देश्य गौ सेवा और संरक्षण के संदेश को देशभर में फैलाना बताया जा रहा है। हालांकि अब इस यात्रा पर रोक लगाने की मांग के बाद यह मामला कानूनी बहस का विषय बन गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद ही कोई निर्णय लेगी। यदि अदालत को यह लगता है कि मामले में किसी प्रकार का जोखिम या जांच पर असर पड़ सकता है, तो वह अस्थायी तौर पर कुछ प्रतिबंध लगा सकती है। वहीं अगर अदालत को ऐसा कोई आधार नहीं मिलता, तो याचिका खारिज भी की जा सकती है। इस पूरे प्रकरण ने धार्मिक और कानूनी दोनों ही क्षेत्रों में चर्चा को जन्म दे दिया है। एक ओर जहां आशुतोष ब्रह्मचारी न्याय की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य के समर्थक इसे एक अनावश्यक विवाद मान रहे हैं।
अब सबकी नजर 13 मार्च को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है। अदालत का फैसला यह तय करेगा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ‘गौ प्रतिष्ठा यात्रा’ जारी रहेगी या उस पर अस्थायी रोक लगाई जाएगी, और क्या उनके विदेश जाने पर किसी तरह का प्रतिबंध लगाया जाएगा या नहीं। फिलहाल यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है और आने वाले दिनों में इस पर महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है।





















