संरक्षण से समृद्धि तक: कोटमीसोनार में मगरमच्छों ने खोले विकास के रास्ते

0
40
Oplus_131072

वन्यजीव संरक्षण से ग्रामीण विकास तक, कोटमीसोनार बना मॉडल गांव

रायपुर  छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले का कोटमीसोनार आज मगरमच्छ संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण विकास और पर्यटन का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है। यहां स्थापित मगरमच्छ संरक्षण आरक्षित केंद्र ने न सिर्फ वन्यजीवों की सुरक्षा को मजबूती दी है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं।

मगरमच्छों का संरक्षण इसलिए अहम माना जाता है क्योंकि यह जैव विविधता को बनाए रखने और पारिस्थितिक संतुलन को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में मगरमच्छ संरक्षण परियोजना की शुरुआत वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत की गई थी, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना, कैप्टिव ब्रीडिंग के माध्यम से उनकी संख्या बढ़ाना और नवजात मगरमच्छों के जीवित रहने की दर को सुधारना है।

वन विभाग ने जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोटमीसोनार स्थित मुड़ातालाब को इस परियोजना के लिए उपयुक्त स्थल के रूप में विकसित किया। जिले के विभिन्न जलाशयों से मगरमच्छों को यहां लाकर सुरक्षित वातावरण में छोड़ा गया। वर्तमान में इस केंद्र में करीब 250 मगरमच्छ संरक्षित हैं।

इस परियोजना की नींव 9 मई 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा रखी गई थी, जबकि 23 अगस्त 2008 को तत्कालीन वन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इसका लोकार्पण किया। लगभग 57.037 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस केंद्र में 34 हेक्टेयर कोर जोन और 23.037 हेक्टेयर बफर जोन निर्धारित किया गया है।

वन विभाग ने इसे पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया है। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए वॉच टावर, इंटरप्रिटेशन सेंटर, कैफेटेरिया, चिल्ड्रन पार्क, ऊर्जा पार्क और 3-डी मिनी थिएटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

गौरतलब है कि 1 नवंबर 2015 से यहां पर्यटन शुल्क लागू किया गया है। इसके बाद से पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। बढ़ती आवाजाही के चलते कोटमीसोनार गांव अब एक छोटे बाजार के रूप में विकसित हो रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के स्थायी अवसर मिल रहे हैं।

यह केंद्र न केवल वन्यजीव संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहा है, बल्कि पर्यटन के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है। कोटमीसोनार स्थित मुड़ातालाब तक पहुंचना भी आसान है। यह जांजगीर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर और बिलासपुर से जयरामनगर मार्ग होते हुए करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके निकटतम रेलवे स्टेशन जांजगीर-नैला, कोटमीसोनार, अकलतरा और बिलासपुर हैं।

इस तरह कोटमीसोनार मगरमच्छ संरक्षण केंद्र आज पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया है।

0Shares

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here