सोशल मीडिया थकान: युवाओं में नया मानसिक संकट (Social Media Fatigue: The New Mental Crisis among Young People)

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Social Media Fatigue: The New Mental Crisis among Young People

क्या आपको भी कभी ऐसा लगता है कि मोबाइल लगातार चेक करने के बाद मन बेचैन होने लगता है, या सोशल मीडिया स्क्रॉल करते-करते दिमाग सुन्न पड़ जाता है? अगर हां, तो सावधान हो जाइए — यह हो सकता है “सोशल मीडिया थकान”, यानी Social Media Fatigue

आज के डिजिटल युग में, जब हर दूसरा नोटिफिकेशन ध्यान खींचने की कोशिश करता है, मानसिक थकान का यह नया रूप तेजी से फैल रहा है।


सोशल मीडिया थकान क्या है?

यह वह स्थिति है जब हमारा दिमाग लगातार ऑनलाइन रहने और तुलना (comparison) की आदत से थक जाता है।
हर “लाइक” या “कमेंट” पर मिलने वाली पलभर की खुशी धीरे-धीरे दिमाग के डोपामिन सिस्टम को प्रभावित करती है।
जब यह सुख लगातार और बिना रुके मिलने लगे, तो दिमाग उसकी आदत डाल लेता है — और जब थोड़ी देर भी रुक जाए, तो बेचैनी, उदासी और खालीपन महसूस होता है।


युवाओं पर इसका असर

एक हालिया मनोवैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि सोशल मीडिया पर 3 घंटे से ज्यादा समय बिताने वाले युवाओं में चिंता (Anxiety), ध्यान की कमी (Low Focus) और नींद की समस्या (Insomnia) जैसी दिक्कतें बढ़ रही हैं।

कई लोग इसे “डिजिटल ओवरलोड” कहते हैं — जहां दिमाग लगातार उत्तेजना की स्थिति में रहता है और आराम करने की क्षमता खो देता है।

कैसे बचें?

दिन में एक “डिजिटल ब्रेक” ज़रूर लें — बिना फोन के कम से कम एक घंटा।
सोने से 30 मिनट पहले मोबाइल बंद करें, नीली रोशनी (blue light) से दूरी बनाएं।
‘डू नॉट डिस्टर्ब’ मोड ऑन करें और नोटिफिकेशन सीमित करें।
असली दुनिया में समय बिताएं — दोस्तों से मिलें, टहलें या कुछ नया सीखें।
और सबसे ज़रूरी, याद रखें — आपका ऑनलाइन समय आपकी मानसिक स्थिति तय नहीं करता।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं:

भारतीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (NIMHANS) की एक रिपोर्ट के अनुसार,

अत्यधिक स्क्रीन टाइम का असर सीधे नींद, मूड और आत्मविश्वास पर पड़ता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक,

“टेक्नोलॉजी से दूरी बनाना आत्मसंयम नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य की ज़रूरत बन गई है।”

अस्वीकरण:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई बातें किसी प्रमाणित चिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की पेशेवर सलाह का विकल्प नहीं हैं। अगर आपको लगातार चिंता, बेचैनी या नींद से जुड़ी समस्या हो, तो किसी योग्य डॉक्टर या मनोवैज्ञानिक से परामर्श लें।
yuvachoupalnews.com इस लेख में दी गई जानकारी के उपयोग या व्याख्या से उत्पन्न किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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