
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 का परिणाम कई युवाओं के लिए सपनों को साकार करने वाला साबित हुआ। इसी कड़ी में प्रयागराज से एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है। सिसई सिपाह, बहरिया स्थित प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका के रूप में कार्यरत पूनम कुमारी की बेटी निवेदिता चंद्रा ने परीक्षा में 855वीं रैंक हासिल कर परिवार के साथ-साथ पूरे जिले का नाम रोशन किया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल मेहनत और लगन की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प के साथ सफलता हासिल की जा सकती है। निवेदिता चंद्रा की सफलता के पीछे उनकी मां का संघर्ष और हौसला सबसे बड़ा आधार रहा। मूल रूप से बलिया जिले के उचेरा की रहने वाली पूनम कुमारी वर्तमान में प्रयागराज के सिविल लाइंस क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रहती हैं। वह शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करते हुए वर्षों से बच्चों को पढ़ाने का काम कर रही हैं। उनके पति दीनानाथ जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर कार्यरत थे और परिवार के लिए मजबूत सहारा थे। हालांकि वर्ष 2021 में परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दीनानाथ डेंगू की चपेट में आ गए और उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। पिता की असमय मौत ने मां और बेटी दोनों को भीतर से झकझोर कर रख दिया। उस समय ऐसा लगा जैसे परिवार की सारी खुशियां एक पल में बिखर गई हों।
लेकिन इसी मुश्किल दौर में पूनम कुमारी ने हार नहीं मानी।

उन्होंने अपनी बेटी को टूटने नहीं दिया और उसे आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित करती रहीं। मां ने न केवल घर की जिम्मेदारियां संभालीं, बल्कि बेटी के सपनों को भी जिंदा रखा। उन्होंने निवेदिता को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने और जीवन में कुछ बड़ा हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया। निवेदिता चंद्रा ने भी अपनी मां के विश्वास और पिता के सपनों को अपनी ताकत बना लिया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पूरी लगन और अनुशासन के साथ UPSC की तैयारी जारी रखी। कई बार चुनौतियां सामने आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रहीं। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 855वीं रैंक हासिल कर ली। निवेदिता की सफलता की खबर जैसे ही परिवार और परिचितों तक पहुंची, खुशी की लहर दौड़ गई। रिश्तेदारों, मित्रों और स्थानीय लोगों ने उन्हें बधाई दी और उनकी मेहनत की सराहना की। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का साहस रखते हैं।

निवेदिता की कहानी यह साबित करती है कि सफलता केवल संसाधनों से नहीं बल्कि मजबूत इरादों, कड़ी मेहनत और परिवार के सहयोग से मिलती है। पिता की कमी और जीवन की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ती रहीं। आज निवेदिता चंद्रा की यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है। उनकी सफलता से यह संदेश मिलता है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में दृढ़ निश्चय हो, तो कोई भी बाधा सफलता की राह में रुकावट नहीं बन सकती। आने वाले समय में निवेदिता देश सेवा के अपने सपने को साकार करते हुए समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनेंगी।























