
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत को नशामुक्त बनाने के लिए 31 दिसंबर 2029 की समय-सीमा तय करने की घोषणा की है। पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने के बाद उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों की समस्या देश के विकास और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। इससे निपटने के लिए केंद्र और राज्य की सभी एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।
अमित शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय ने नशे के खिलाफ अगले साढ़े तीन वर्षों में व्यापक और समन्वित अभियान चलाने का संकल्प लिया है। उन्होंने सभी राज्यों की पुलिस और संबंधित एजेंसियों से अपील की कि वे इस अभियान में एकजुट होकर काम करें और तय समय-सीमा तक देश को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास करें।
पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद जवानों को किया नमन
राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि पुलिस और सुरक्षा बलों ने कठिन परिस्थितियों में साहस, अनुशासन और संयम का परिचय देते हुए देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया है। जवानों का बलिदान देश की सुरक्षा व्यवस्था की मजबूत नींव है।
नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई और सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना
गृह मंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन बलों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने और चुनावी प्रक्रियाओं को सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शाह ने पश्चिम बंगाल में हालिया विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि राज्य के इतिहास में पहली बार चुनाव संबंधी हिंसा में किसी की जान नहीं गई। उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार में भी चुनावी हिंसा पर अंकुश लगाने में सुरक्षा बलों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
कश्मीर, पूर्वोत्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का किया जिक्र
अमित शाह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने कश्मीर, पूर्वोत्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से जुड़ी चुनौतियां प्रमुख रही हैं। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों में सुरक्षा की स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने कश्मीर में आतंकवाद पर नियंत्रण के प्रयासों, पूर्वोत्तर में शांति समझौतों और नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में कई शांति समझौतों के बाद हजारों लोगों ने हथियार छोड़े हैं। वहीं, नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने लंबे समय से चली आ रही चुनौती का मुकाबला किया है।
राष्ट्रीय पुलिस स्मारक को बताया बलिदान का प्रतीक
गृह मंत्री ने वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय पुलिस स्मारक के उद्घाटन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह स्मारक देशभर के उन पुलिसकर्मियों के बलिदान को सम्मान देने के लिए बनाया गया है, जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपनी जान गंवाई।
अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत ने वैश्विक मंच पर महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है और इसमें पुलिस तथा सुरक्षा बलों के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर दिया कि देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा में जवानों का समर्पण राष्ट्र की प्रगति का अहम आधार है।
गृह मंत्री के अनुसार, नशे के खिलाफ अभियान को सफल बनाने के लिए केंद्र, राज्य सरकारों, पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा। 31 दिसंबर 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने का घोषित लक्ष्य इसी व्यापक अभियान का हिस्सा है।















