
रायपुर शहर में ड्रग्स का एक ऐसा नेटवर्क सामने आया है, जो फिल्मों की तरह गुप्त तरीके से काम कर रहा था। रायपुर पुलिस ने इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए 6 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें इसके मास्टरमाइंड भी शामिल हैं।
पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ‘डेड ड्रॉप सिस्टम’ का इस्तेमाल कर रहे थे। यानी ड्रग्स को सीधे हाथों में देने के बजाय सुनसान जगहों पर छिपा दिया जाता था और फिर ग्राहकों को सिर्फ लोकेशन और वीडियो भेजकर वहां से उठाने को कहा जाता था।
इस पूरे खेल में रैपिडो बाइक राइडर्स और कोरियर सर्विस का इस्तेमाल किया जा रहा था, ताकि किसी को शक न हो।
जांच में पता चला कि इस नेटवर्क को दिल्ली से बैठकर महेश खड़का और कुसुम हिन्दुजा चला रहे थे। ये दोनों पहले भी ड्रग्स के मामले में जेल जा चुके हैं, लेकिन बाहर आकर फिर उसी धंधे में लग गए।
पुलिस को सूचना मिली थी कि शहर में इस तरह से एमडीएमए ड्रग्स सप्लाई हो रही है। इसके बाद टीम ने टेक्निकल सर्विलांस और लगातार निगरानी शुरू की। 29 मार्च को काशीराम नगर इलाके में तीन रैपिडो राइडर्स को पकड़ने के बाद पूरी कड़ी खुलती चली गई।
पूछताछ में सामने आया कि कुणाल मंगतानी कोरियर से ड्रग्स रिसीव करता था और फिर राइडर्स के जरिए उसे अलग-अलग जगहों पर पहुंचाया जाता था।
इसके बाद पुलिस टीम दिल्ली पहुंची और दोनों मास्टरमाइंड को पकड़कर रायपुर लाई। अब उनसे पूछताछ में एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि ड्रग्स का कनेक्शन नाइजीरियन सप्लायर्स से भी जुड़ा हो सकता है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब 48 ग्राम एमडीएमए, पार्टी पिल्स, मोबाइल फोन, बाइक और कोरियर बॉक्स बरामद किए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 10 लाख रुपये बताई जा रही है।
पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ एक नेटवर्क नहीं, बल्कि एक बड़ी चेन का हिस्सा हो सकता है। ऐसे में आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
साथ ही पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि वे नशे से दूर रहें और अगर कहीं भी ऐसी गतिविधि दिखे तो तुरंत जानकारी दें—क्योंकि इस लड़ाई में समाज का साथ भी उतना ही जरूरी है।



















