राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सही, सार्थक जीवन जीना ही महत्वपूर्ण है। भौतिक संसाधनों से क्षणिक सुख प्राप्त होता है। वास्तविक सुख आत्मीय आनंद में है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा के ग्रंथों और महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लें तथा उनकी नैतिकता, आदर्शों और जीवन मूल्यों को आचरण में आत्मसात करें।राज्यपाल पटेल शनिवार को इन्फोटेक एजुकेशन सोसायटी के IES विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में विश्वविद्यालय द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 45 शोधार्थियों को पीएचडी, 231 को स्नातकोत्तर और 938 को स्नातक की उपाधि प्रदान की गई।इस अवसर पर राज्यसभा सांसद गोविन्द लालजी भाई ढोलकिया, सांसद पद्मश्री डॉ. पी.टी. ऊषा, वाइस चेयरपर्सन एवं प्रेसिडेंट इंडियन ओलम्पिक एसोसिएशन, क्रिकेटर चन्द्रकांत सीताराम पंडित, शिक्षा के क्षेत्र में माधुरी सहस्बुद्धे, मूर्तिकार अरुण योगीराज, जल संग्रहण में उमाशंकर पाण्डे, आयुर्वेदाचार्य बालेन्दु प्रकाश तथा नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जीवन सिंह टटियाल को मानद उपाधि प्रदान की गई।राज्यपाल पटेल ने कहा कि रामायण एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के लिए जीवन आदर्श मिलते हैं। उन्होंने राम–लक्ष्मण संवाद के प्रसंग के माध्यम से युवाओं को सांस्कृतिक जीवन मूल्यों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और यह शिक्षा, अनुसंधान एवं राष्ट्र निर्माण की दिशा में संस्थान की सतत यात्रा का उत्सव भी है। विद्यार्थियों की सफलता में माता-पिता का त्याग, गुरुजनों का मार्गदर्शन और समाज का योगदान निहित है। विद्यार्थियों को कृतज्ञता भाव के साथ समाज और राष्ट्र सेवा में सहभागी बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत समर्थ, सशक्त, समृद्ध और विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है। विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी और सार्थक रूप में लागू करें, क्योंकि शिक्षण संस्थान भावी पीढ़ी के निर्माता होते हैं।पशुपालन डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने कहा कि जीवन में सफलता शॉर्टकट से नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत से मिलती है। दीक्षांत गुरुओं और माता-पिता के संरक्षण से बाहर निकलकर स्वतंत्र जीवन के शुभारंभ का अवसर है, जहां से जीवन की दिशा तय होती है।सांसद डोलकिया ने विद्यार्थियों से कहा कि वे स्वयं अपना ब्रांड बनें, दूसरों का अनुकरण न करें, स्वतंत्र रहें लेकिन स्वच्छंद न बनें तथा संस्कृति और जीवन मूल्यों से जुड़े रहें। सांसद पद्मश्री डॉ. पी.टी. ऊषा ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक प्रयासों की सराहना करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता की शुभकामनाएं दीं।दीक्षांत समारोह में स्वागत उद्बोधन विश्वविद्यालय के चांसलर इंजीनियर बी.एस. यादव ने दिया। प्रगति प्रतिवेदन का वाचन एवं दीक्षांत शपथ वाइस चांसलर जी.के. पाण्डेय ने दिलाई। आभार प्रदर्शन मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवांश सिंह ने किया। इस अवसर पर माया नरोलिया (राज्यसभा सांसद), देवांश सिंह (सीईओ, IES विश्वविद्यालय), डॉ. कविता पाटीदार (राज्यसभा सांसद), शांडिल्य जी महाराज (पीठाधीश्वर, करुणाधाम आश्रम), डॉ. सुनीता सिंह (पूर्व चांसलर, IES विश्वविद्यालय), इंजीनियर बी.एस. यादव (फाउंडर एवं चांसलर), सुमेर सिंह सोलंकी (राज्यसभा सांसद) सहित अन्य अतिथि मंचासीन थे।लोवर हेडर- IES विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल का संदेश: सार्थक जीवन ही वास्तविक सफलतादीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने युवाओं को दिए जीवन मूल्यों के संदेशसार्थक जीवन, नैतिक मूल्य और राष्ट्र निर्माण पर राज्यपाल का जोरIES विश्वविद्यालय के दीक्षांत में राज्यपाल का प्रेरक संबोधनभौतिक सुख नहीं, सार्थक जीवन महत्वपूर्ण: राज्यपाल

















