
प्रशासनिक सुधारों और नवाचारों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित कराने पर जोर, विशेषज्ञों ने शोध, दस्तावेजीकरण और अकादमिक प्रकाशन की बारीकियां समझाईं
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे नवाचारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की पहल की जा रही है। इसी क्रम में नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर में पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आयोजित दो दिवसीय ‘वर्कशॉप ऑन केस राइटिंग एंड कोलैबोरेटिव पब्लिकेशन’ 15 अक्टूबर को संपन्न हुई।
14 और 15 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यशाला में विभागीय सुधारों, प्रशासनिक निर्णयों, उनके क्रियान्वयन के दौरान आई चुनौतियों और उनके समाधान को केस स्टडी के रूप में तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। इसका उद्देश्य इन अनुभवों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक जर्नलों में प्रकाशित कराने की प्रक्रिया से अधिकारियों को परिचित कराना था।
प्रशासनिक नवाचारों को मिलेगी अकादमिक पहचान
महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक पुष्पेंद्र मीणा के नेतृत्व में विभाग पंजीयन सेवाओं को सरल, पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में काम कर रहा है। अब इन सुधारों से प्राप्त अनुभवों को व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकृत कर शोध, अध्ययन और प्रशासनिक प्रशिक्षण का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
कार्यशाला का उद्देश्य विभागीय उपलब्धियों को केवल प्रशासनिक रिकॉर्ड तक सीमित न रखकर उन्हें उपयोगी अध्ययन सामग्री के रूप में विकसित करना था। केस स्टडी के माध्यम से देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, प्रशासकों और नीति-निर्माताओं को छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और नवाचारों से सीखने का अवसर मिल सकेगा।
केस स्टडी लेखन और प्रकाशन की बारीकियां समझाईं
कार्यशाला के पहले दिन विशेषज्ञों ने केस स्टडी लेखन की आवश्यकता, उसकी संरचना, विषय चयन, समस्याओं की पहचान और प्रशासनिक अनुभवों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की तकनीकों की जानकारी दी। अधिकारियों को समझाया गया कि किसी महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय के पीछे की परिस्थितियां, क्रियान्वयन में आई कठिनाइयां और उनके समाधान किस तरह एक प्रभावी केस स्टडी का आधार बन सकते हैं।
दूसरे दिन व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर दिया गया। इसमें आवश्यक सूचनाओं का संकलन, तथ्यों का सत्यापन, संबंधित व्यक्तियों के साक्षात्कार, केस की रूपरेखा तैयार करना और विश्लेषणात्मक लेखन जैसी प्रक्रियाएं शामिल रहीं। इसके अलावा टीचिंग नोट तैयार करने, उपयुक्त अकादमिक जर्नल चुनने तथा समीक्षा और प्रकाशन की प्रक्रिया के बारे में भी मार्गदर्शन दिया गया।
IIM रायपुर के विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन
कार्यशाला में पंजीयन विभाग के डीआईजी मदन लाल कोर्पे और डीआईजी उषा साहू सहित विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।
IIM रायपुर के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. संजीव पाराशर, कार्यक्रम निदेशक प्रो. प्रणित कुमार रॉय, प्रो. सत्यसिबा दास, प्रो. मनोजीत चट्टोपाध्याय, प्रो. अर्चना पाराशर और प्रो. आर.के. जना सहित अन्य विशेषज्ञों ने विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
विशेषज्ञों ने बताया कि एक अच्छी केस स्टडी किसी समस्या और उसके समाधान को सामने रखने के साथ निर्णय लेने की प्रक्रिया, उपलब्ध विकल्पों और उनसे मिली सीख को भी स्पष्ट करती है। इससे प्रशासनिक अनुभवों को दूसरे विभागों और संस्थानों के साथ साझा करने में मदद मिलती है।
प्रतिभागियों को दिए गए प्रमाणपत्र
कार्यशाला के समापन अवसर पर पंजीयन विभाग के डीआईजी मदन लाल कोर्पे, IIM रायपुर के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. संजीव पाराशर और कार्यक्रम निदेशक प्रो. प्रणित कुमार रॉय ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए।
इस पहल से विभागीय सुधारों और नवाचारों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण होने की उम्मीद है। इससे भविष्य में अधिकारियों के प्रशिक्षण, नीति निर्माण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही, पंजीयन विभाग और IIM रायपुर के बीच ज्ञान एवं अनुभवों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा।


















