नेपाल में 115 दिनों बाद मंत्री कुलमान घिसिंग ने दिया इस्तीफा

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काठमांडू । नेपाल के कैबिनेट मंत्री कुलमान घिसिंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह कदम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की द्वारा राजनीतिक दलों से जुड़े मंत्रियों पर मंत्री पद छोड़ने के दबाव के बीच उठाया गया है। ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई, भौतिक अवसंरचना और परिवहन तथा शहरी विकास मंत्रालयों का प्रभार संभाल रहे घिसिंग ने 115 दिनों के कार्यकाल के बाद प्रधानमंत्री कार्की को अपना इस्तीफा सौंपा। उन्हें पिछले वर्ष 15 सितंबर को मंत्री नियुक्त किया गया था। माना जा रहा है कि घिसिंग ‘उज्यालो नेपाल पार्टी’ के गठन में प्रमुख भूमिका में थे, जो बाद में 29 दिसंबर को राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) में विलय हो गई। दोनों पक्षों के बीच हुई समझ के तहत घिसिंग के आरएसपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनने की संभावना है। आरएसपी भंग हुई प्रतिनिधि सभा में चौथी सबसे बड़ी पार्टी थी।

घिसिंग के इस वर्ष 5 मार्च को प्रस्तावित संसदीय चुनाव लड़ने की भी संभावना जताई जा रही है। इस्तीफा देने के बाद घिसिंग ने संकेत दिया कि उन पर पार्टी राजनीति में शामिल होने के आरोप उनके पद छोड़ने की एक वजह बने। हाल के दिनों में इस बात की आलोचना बढ़ रही थी कि एक कथित रूप से गैर-राजनीतिक अंतरिम सरकार में शामिल मंत्री खुले तौर पर दलगत गतिविधियों में संलिप्त हैं।

बताया गया है कि सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने पार्टी राजनीति में सक्रिय मंत्रियों को सरकार छोड़ने के निर्देश दिए थे। उल्लेखनीय है कि सितंबर की शुरुआत में हुए जेन-जेड आंदोलन के बाद 12 सितंबर को गठित अंतरिम सरकार को व्यापक रूप से तटस्थ, निष्पक्ष और राजनीतिक बोझ से मुक्त माना जा रहा है।

इस्तीफे के बाद आयोजित एक प्रेस वार्ता में घिसिंग ने दावा किया कि वह किसी भी राजनीतिक दल के सदस्य नहीं हैं और उज्यालो नेपाल पार्टी तथा आरएसपी के बीच हुआ समझौता अभी औपचारिक रूप से लागू नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल के इतिहास में अंतरिम और चुनावी सरकारों के प्रधानमंत्री व मंत्री पद पर रहते हुए भी चुनाव लड़ते रहे हैं। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 18 घंटे तक की बिजली कटौती (लोड शेडिंग) खत्म करने का श्रेय पाने वाले घिसिंग देश के सबसे लोकप्रिय सार्वजनिक व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं।

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