एमएसएमई को बढ़ावा: पारस्परिक ऋण गारंटी योजना में बड़े बदलाव

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एमएसएमई को बढ़ावा: पारस्परिक ऋण गारंटी योजना में बड़े बदला


नई दिल्ली केंद्र सरकार ने बजट 2025-26 के अनुरूप सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को प्रोत्साहन देने के लिए पारस्परिक ऋण गारंटी योजना में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य खासतौर पर विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र को मजबूती देना है।

इस योजना के तहत पात्र एमएसएमई को मशीनरी और उपकरण खरीदने के लिए 100 करोड़ रुपये तक के सावधि ऋण पर 60 प्रतिशत तक गारंटी कवरेज दिया जाता है। यह योजना नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के माध्यम से संचालित होती है, जिससे बैंकों के जरिए उद्यमों को आसानी से ऋण उपलब्ध हो पाता है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, नए संशोधनों से योजना का दायरा बढ़ेगा, अनुपालन प्रक्रिया सरल होगी और निर्यातक एमएसएमई को विशेष लाभ मिलेगा। संशोधित प्रावधानों के तहत चौथे वर्ष के बाद किस्तों में 5 प्रतिशत अग्रिम अंशदान की वापसी की सुविधा दी गई है। साथ ही, संतोषजनक ऋण प्रदर्शन होने पर चौथे वर्ष से हर साल 1 प्रतिशत राशि वापस की जा सकेगी।

सरकार ने पात्रता मानदंड में भी बदलाव करते हुए अब सेवा क्षेत्र के एमएसएमई को भी योजना के दायरे में शामिल कर लिया है। इसके अलावा, मशीनरी और उपकरणों के लिए न्यूनतम परियोजना लागत की अनिवार्यता को पहले के 75 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे अधिक उद्यमों को लाभ मिल सकेगा।

मंत्रालय का मानना है कि इन संशोधनों से एमएसएमई क्षेत्र के लिए ऋण उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा और देश के विनिर्माण एवं निर्यात क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।

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