दूसरे सोच नहीं पाए, शाह ने करके दिखाया

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राजनीति में नेता तो बहुत होते हैं,बहुत नेता काम करने वाले भी होते हैं लेकिन ऐसे नेता बहुत कम होते हैं जो वह काम भी करके दिखा देते हैं जिसको दूसरे नेता असंभव मानते थे, यानी मानते थे ऐसा तो हो ही नहीं सकता, ऐसा तो कोई कर नहीं सकता। पीएम मोदी,अमित शाह व योगी आदित्यनाथ ऐसे ही नेता है। ये तीनों नेता ऐसा सोचते ही नही है कि कोई काम नहीं किया जा सकता। जो भी काम करना होता है, वह सोचते है, इस काम को किया जा सकता है, जब कोई यह सोच लेता है कि काम को करना ही है तो वह भी सोच लेता है कि इस काम को कैसे किया जा सकता है।उसके लिए योजना बनाता है।योजना पर गंभीरता से अमल किया जाता है।जब नेता किसी काम के प्रति गंभीर होता है तो उसकी पूरी टीम भी काम के प्रति गंभीर होती है और ऐसी टीम ही वह काम करके दिखाती है जिसे पहले असंभव माना जाता था।

 

देश में एक से एक बड़े नेता मोदी के पहले हुए हैं लेकिन बहुत से काम जो मोदी ने किए वह भी कर सकते थे लेकिन वह नही कर सके। मोदी चाहे धारा-३७०हटाना हो,राममंदिर बनाना हो, तीन तलाक हो,नया संसद भवन बनाना हो, सबसे बड़ी पटेल की मूर्ति बनाना हो, सबसे बड़ा स्टेडियम बनाना हो, सबसे ऊंचा पुल बनाना हो, भारत मंडपम बनाना हो, जीएसटी लागू करना हो,वक्फ संशोधन कानून लागू करना हो। तीन बार लोकसभा का चुनाव जीतना हो, मोदी ने सब करके दिखाया है। इसके बाद यूपी के सीएम आदित्यनाथ योगी ऐसे नेता है जो कहते हैं,वह करके दिखाते भी हैं।उन्होंने कहा माफिया को मिट्टी में मिला देंगे, माफिया को मिट्टी में मिलाकर दिखाया भी। कानून व्यवस्था को सुधार कर दिखाएंगे,सुधार कर दिखाया भी।कभी यूपी बीमारु राज्य माना जाता था आज यूपी को योगी ने तेजी से विकास करता हुआ राज्य हैं। यूपी में एक बार चुनाव जीतने के बाद दूसरी बार चुनाव जीतना मुश्किल माना जाता है, योगी ने यूपी में दूसरी बार चुनाव जीतकर दिखाया है।

 

तीसरे नेता अमित शाह, वह भी जो काम उनको मोदी ने सौंपा, वह काम उन्होंने करके दिखा दिया है। मोदी ने उनको यूपी में भाजपा को जिताने का पहला काम सौंपा तो तब यूपी में अकेले दम पर भाजपा की जीत का कोई भाजपा नेता सपना नहीं देखता था।अमित शाह ने यह असंभव समझा जाने वाला काम करके दिखाया जिस यूपी में अकेले किसी दल की सरकार बनना मुश्किल माना जाता था। अमित शाह ने लंबे समय बाद यूपी में भाजपा की बहुमत वाली सरकार बनाकर दिखाया।क्योंकि तब सपा व बसपा मजबूत राजनीतिक दल थे और भाजपा व कांग्रेस तीसरे चौथे नंबर के राजनीतिक दल हुआ करते थे। यह अमित शाह का चमत्कार जैसा था।

 

इसके बाद अमित शाह गृहमंत्री बने तो पहले आतंकवाद की समस्या का समाधान किया।उसके बाद उन्होंने देश से नक्सलवाद का सफाया करने का फैसला किया और छत्तीसगढ़ में साय सरकार बनने के बाद नक्सलियों के सफाए के लिए तारीख ३१ मार्च २०२६ पहले तय कर दी।उन्होंने खुद ही यह लक्ष्य पहले से तय कर दिया कि इस तारीख तक देश व बस्तर से नक्सली समस्या का समाधान कर देना है। अमित शाह के पहले किसी नेता ने नक्सलियों के सफाए की सोची नहीं, अमित शाह ने सोचा भी और योजना भी बनाई कि नक्सलियों का बस्तर से सफाया कैसे हो सकता है।उस पर गंभीरता से अमल भी करवाया। अमित शाह एक बात सबसे पहले समझने मे सफल रहे कि नक्सलियों का सफाया करना है तो बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानो की संख्या नक्सलियों से ज्यादा होनी चाहिए। तब ही सुरक्षा बल नक्सलियों का मुकाबला कर पाएंगे,उनको घेर कर मार पाएंगे। पहले नक्सली सुरक्षा बलों को घेरकर मारते थे,अमित शाह की योजना का परिणाम था कि अब सुरक्षा बल नक्सलियों को घेरकर मारने लगे। बड़े से बड़े नेता को इसी तरह मारा गया। इससे नक्सलियों में पहली बार मारे जाने का खौफ पैदा हुआ और इसी वजह से नक्सलियो में सरेंडर करने की लहर पैदा हुई और कभी सौ तो कभी दो सौ से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर किया है।

 

नक्सलियों के सरेंडर व सफाए मे साय सरकार की भी बड़ी भूमिका रही है, साय सरकार जानती थी कि नक्सलियों के सफाए के लिए मारने से ज्यादा जरूरी सरेंडर करवाना है, इसके लिए साय सरकार ने नक्सलियों के पुनर्वास की बेहतर योजना बनाई। इसके बाद दो टूक कह दिया गया कि कोई शांति वार्ता नहीं होगी, या तो सरेंडर करो या मारे जाओ।इस वजह से जितने नक्सली मारे गए उससे ज्यादा ने सरेंडर किया है।बीते २२ महीनों में ४७७ नक्सली मारे गए हैं,२११० ने सरेंडर किया है तथा १७८५ गिरफ्तार किए गए हैं। लगभग दो साल में बस्तर में नक्सलियों की संख्या ढाई हजार ज्यादा कम करने में अमित शाह व साय सरकार सफल रहे हैं।अबुझमाड़ व उत्तर बस्तर नक्सलमुक्त हो गया है, अमित शाह व साय सरकार की बड़ी सफलता है।

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