भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के नियमानुसार सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय क्षेत्रीय कार्यालय ग्वालियर के अधीन उप-क्षेत्रीय कार्यालय उज्जैन द्वारा मंगलवार को ‘तिमाही हिन्दी कार्यशाला’ का आयोजन किया गया ।कार्यक्रम का शुभारम्भ किरन, सहायक निदेशक एवं रामगोपाल विजय, सहायक निदेशक, क्षेत्रीय कार्यालय ग्वालियर द्वारा डॉ. उमा वाजपेयी, पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष, शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उज्जैन एवं प्रो. गीता नायक, सीनियर प्रोफेसर, हिन्दी अध्ययनशाला, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन का स्वागत कर किया गया।उक्त कार्यशाला में डॉ. उमा वाजपेयी द्वारा बताया गया कि कार्यालयों के अंतर्गत कामकाज में हिन्दी के उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि भाषा की मानकता तय करना आवश्यक है क्योंकि भाषा एक बहते हुए पानी के समान है, उसकी धारा में शुध्दता भी बढ़ सकती है और अशुध्दता भी। भाषा की शुध्दता का पैमाना व्याकरण है। उन्होंने बताया कि बोली भी भाषा बन जाती है जब उसका साहित्यिक उपयोग होने लगे एवं व्याकरण सम्मत हो जाये। साथ ही प्रो. गीता नायक ने बताया कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण अंग है।” यह हमारी भावनाओं, विचारों और परंपराओं को व्यक्त करने का प्रमुख माध्यम है। हमें हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देकर अपनी परंपराओं और पहचान को सशक्त बनाना चाहिए ।कार्यशाला में क्षेत्रीय कार्यालय ग्वालियर, उपक्षेत्रीय कार्यालय उज्जैन, उपक्षेत्रीय कार्यालय रतलाम एवं उपक्षेत्रीय कार्यालय शिवपुरी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।कार्यशाला का समापन सुनील परिहार, वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी द्वारा कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त कर किया गया।
























