बात फायदे और नुकसान की है…..

0
187

सुनील दास

राजनीति हो या व्यापार हो उसमें फायदा तो देखा ही जाता है, नुकसान की भी परवाह की जाती है। राजनीति में राजनीतिक फायदा पहले देखा जाता है। क्योंकि राजनीतिक फायदे से ही सत्ता मिलती है। इसलिए राजनीतिक फायदे के लिए किसी राजनीतिक दल की सरकार को आर्थिक नुकसान भी होता है तो वह उस नुकसान की ज्यादा परवाह नहीं करती है, वह अपने आर्थिक नुकसान की जगह यह देखती है कि राजनीतिक फायदा ज्यादा हुआ है या नहीं।छत्तीसगढ़ की राजनीति में किसान के साथ महिलाएं भी बड़ा वोट बैंक हैं। जो उनको अपनी नीतियों व योजनाओं से प्रभावित करता है। वह उसी को वोट देते हैं। इससे राजनीतिक दल की सरकार बनती है। यानी छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दल के लिए किसानों व महिलाओं का वोट पाना जरूरी है।

 

राज्य में किसानों व महिलाओं का वोट पाने के लिए राजनीतिक दल ऐसी नीतियां , ऐसी योजनाएं बनाते रहे हैं जिससे उनकी सरकार बनना पक्का हो सके। चाहे रमन सिंह सरकार हो, चाहे भूपेश बघेल सरकार हो, चाहे साय सरकार हो। सब की राजनीति के केंद्र में किसान व महिलाएं रही हैं। उन्हीं के वोट इनकी सरकारे बनीं है और सरकारें गईं भी हैं।भूपेश सरकार के समय से किसानों का ज्यादा पैसे देकर ज्यादा धान खरीदने की योजना से भूपेश सरकार के बाद साय सरकार को भी फायदा हुआ है,दोनों की सरकार बनी है। दोनों को नुकसान भी हुआ है। दोनों को राजनीतिक रूप से फायदा हुआ है तो आर्थिक रूप से नुकसान हुआ है।

 

भूपेश बघेल सरकार को हर साल किसानों से ज्यादा धान खरीदने के कारण एक साल कई हजार करोड़ का घाटा हुआ था क्योंकि भूपेश सरकार को हर साल पिछले साल से ज्यादा धान खरीदना पड़ता था, यह दिखाने के लिए कि वह किसानों का धान हर साल ज्यादा खरीद रही है। ज्यादा धान खरीदने का परिणाम यह होता है कि बहुत सारा धान बच जाता है,उसे सरकार काे कम कीमत पर बेचना पड़ता है। भूपेश बघेल सरकार को एक साल ऐसा करना पड़ा था, साय सरकार को पिछली बार ज्यादा धान खरीदने के कारण ऐसा करना पड़ा है,साय सरकार के पास अभी भी बहुत सारा धान पड़ा है, कोई खरीद नहीं रहा है, सस्ते में भी कोई खरीद नहीं रहा है। इससे साय सरकार को कई हजार करोड़ का घाटा हुआ है।

 

इस घाटा को कम करने के लिए सरकार यह तो कह नहीं सकती कि वह पिछली बार से कम धान किसानों से खरीदेगी। धान से ज्यादा कमाई होने के कारण किसान तो धान ही ज्यादा लेंगे। सरकार ज्यादा धान न लें, इसके लिए भूपेश सरकार ने जो किया था,वही साय सरकार कर रही है, वह किसानों को धान की जगह तिलहन-दलहन,मक्का आदि की फसल लेने के लिए प्रेरित कर रही है।साय सरकार ने फैसला किया है, इस सीजन में जो किसान धान की जगह दूसरी फसल लेते हैं उनको किसान उन्नति योजना के तहत बोनस दिया जाएगा।इससे होगा क्या, इससे किसान धान की जगह दूसरी फसल लेते हैं तो धान का उत्पादन कम होगा, सरकार को ज्यादा धान नहीं खरीदना पड़ेगा, ज्यादा धान नहीं खरीदने से सरकार को घाटा नहीं होगा या होगा तो कम होगा।

 

ज्यादा धान खरीदने से भूपेश सरकार को भी घाटा हुआ था और साय सरकार को भी घाटा हुआ है। ऐसे में सरकार किसानों का धान कम खरीद कर उनको नुकसान तो नहीं कर सकती,ऐसा करने पर विपक्ष सरकार पर आरोप लगाएगा कि सरकार ने कम धान खरीदा इससे किसानों को घाटा हुआ है। किसान कम धान ले और दूसरी फसल ले तो सरकार यह कह सकती है कि किसानों ने धान कम पैदा किया है, इसलिए सरकार ने कम धान खरीदा है, सरकार किसानों का भला चाहती है इसलिए उसने दूसरी फसल लेने पर किसानों को बोनस दिया है। यानी किसानों की आय कम धान लेने पर भी कम नहीं हुई है। अभी ज्यादा धान खरीदने के कारण किसानों को फायदा हो रहा है लेकिन सरकार को नुकसान हो रहा है। सरकार की कोशिश है कि इस नुकसान को समाप्त किया जाए या कम किया जाए।

0Shares

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here